11 views 37 secs 0 comments

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की ट्रैकिंग होगी और भी मजबूत

In National
February 11, 2026
RajneetiGuru.co.in - दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की ट्रैकिंग होगी और भी मजबूत - AI Generated Image

नई दिल्लीवायु प्रदूषण के बारहमासी खतरे के खिलाफ अपनी रणनीतिक प्रतिक्रिया को तेज करने के लिए एक बड़े कदम के रूप में, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ‘निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र’ (CAAQMS) नेटवर्क के बड़े विस्तार की घोषणा की है। सामान्य जनसंख्या-आधारित निगरानी से हटकर अब एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले ‘ग्रिड-आधारित’ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर, यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सघन और परिष्कृत वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों में से एक की मेजबानी करने के लिए तैयार है।

वर्षों से, दिल्ली और इसके पड़ोसी शहर “गंभीर” और “खतरनाक” वायु गुणवत्ता से जूझ रहे हैं, विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में। हालांकि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसे नीतिगत हस्तक्षेप लागू हैं, लेकिन ऐसे उपायों की प्रभावशीलता पूरी तरह से डेटा की सूक्ष्मता और विश्वसनीयता पर निर्भर करती है। नए घोषित विस्तार का उद्देश्य औद्योगिक केंद्रों, उपनगरीय किनारों और उच्च यातायात वाले गलियारों में “डेटा ब्लाइंड स्पॉट” (जहाँ निगरानी की कमी है) को समाप्त करना है, ताकि 55,000 वर्ग किलोमीटर के एनसीआर में ली जाने वाली हर सांस का हिसाब रखा जा सके।

एक सघन नेटवर्क का ब्लूप्रिंट

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वर्तमान निगरानी ढांचा 84 परिचालन स्टेशनों से बना है। इसमें दिल्ली में 40, हरियाणा (एनसीआर) में 22, राजस्थान (एनसीआर) में 4 और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 18 स्टेशन शामिल हैं। हालांकि, जैसे-जैसे राजधानी का शहरी विस्तार अलवर, मेरठ और सोनीपत जैसे जिलों की ओर बढ़ रहा है, मौजूदा घनत्व प्रदूषकों के सूक्ष्म-जलवायु परिवर्तनों को पकड़ने के लिए अपर्याप्त साबित हुआ है।

इसे दूर करने के लिए, CAQM वर्तमान में 27 नए CAAQMS को तत्काल जोड़ने की निगरानी कर रहा है। जहाँ दिल्ली के लिए निर्धारित 6 स्टेशन पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं, वहीं हरियाणा में 7, राजस्थान में 4 और उत्तर प्रदेश में 10 स्टेशनों की खरीद और स्थापना का काम अंतिम चरण में है।

हालांकि, असली बदलाव विस्तार के अगले चरण में आएगा। इन तत्काल 27 स्टेशनों से आगे बढ़ते हुए, CAQM ने कठोर वैज्ञानिक मानदंडों के आधार पर 46 अतिरिक्त स्टेशनों की स्थापना को मंजूरी दी है। एक बार पूरा हो जाने पर, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी स्टेशनों की कुल संख्या बढ़कर 157 हो जाएगी।

इस 157-स्टेशन नेटवर्क का वितरण इस प्रकार होगा:

  • दिल्ली: 60 स्टेशन

  • हरियाणा (एनसीआर): 45 स्टेशन

  • उत्तर प्रदेश (एनसीआर): 43 स्टेशन

  • राजस्थान (एनसीआर): 9 स्टेशन

वैज्ञानिक ग्रिड-आधारित निगरानी की ओर बदलाव

इस विस्तार को जो बात विशिष्ट बनाती है, वह है कार्यप्रणाली (Methodology) में बदलाव। ऐतिहासिक रूप से, स्टेशन मुख्य रूप से जनसंख्या घनत्व के आधार पर स्थापित किए जाते थे। नया रोडमैप एक ‘ग्रिड-आधारित स्थानिक कवरेज’ (Grid-Based Spatial Coverage) मॉडल पेश करता है।

उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों के “आंतरिक घेरे” के लिए—जिसमें दिल्ली और उसके तत्काल पड़ोसी जैसे गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और सोनीपत शामिल हैं—CAQM ने प्रत्येक 25 वर्ग किलोमीटर (5 किमी x 5 किमी ग्रिड) के लिए एक स्टेशन स्थापित करने का आदेश दिया है। अन्य जिला मुख्यालयों और बाहरी एनसीआर शहरों में, यह घनत्व प्रत्येक 50 वर्ग किलोमीटर पर एक स्टेशन होगा।

यह ग्रिड-आधारित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि भूमि-उपयोग की विशेषताएं—जैसे आवासीय क्षेत्र, भारी यातायात वाले चौराहे और औद्योगिक क्लस्टर—पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व करें। इसके अलावा, प्रदूषकों के लंबी दूरी के परिवहन को मापने के लिए “पृष्ठभूमि” (Background) और “सीमावर्ती” (Border) स्टेशनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे वैज्ञानिकों को यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि दिल्ली का कितना प्रदूषण स्थानीय है और कितना पड़ोसी राज्यों से पराली जलाने या औद्योगिक धुएं के कारण आ रहा है।

विशेषज्ञों की राय: एक हथियार के रूप में डेटा

पर्यावरणविदों और नीति विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है, और कहा है कि अधिक सेंसर अधिक जवाबदेही की ओर ले जाते हैं।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी का कहना है, “एक मजबूत निगरानी नेटवर्क स्वच्छ हवा की दिशा में पहला कदम है। जब आपके पास अति-स्थानीय (hyper-local) डेटा होता है, तो आप सामान्य प्रतिबंधों के बजाय प्रदूषण के स्रोतों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर सकते हैं। एनसीआर में ग्रिड-आधारित विस्तार अधिकारियों को वास्तविक समय में ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान करने और पूरे क्षेत्र की वायु गुणवत्ता बिगड़ने से पहले आपातकालीन उपाय करने की अनुमति देगा।”

CAAQMS के पीछे की तकनीक

मैनुअल निगरानी स्टेशनों के विपरीत जो 24 घंटे के बाद डेटा प्रदान करते हैं, एक ‘निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र’ (CAAQMS) मिनट-दर-मिनट अपडेट प्रदान करता है। ये परिष्कृत इकाइयाँ प्रदूषकों के एक समूह को मापती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • पार्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5): श्वसन संबंधी समस्याओं के पीछे मुख्य अपराधी।

  • गैसीय प्रदूषक: नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$), सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_2$), कार्बन मोनोऑक्साइड ($CO$), और ओजोन ($O_3$)।

  • मौसम संबंधी पैरामीटर: हवा की गति, दिशा, आर्द्रता और सौर विकिरण, जो यह अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि प्रदूषण कैसे फैलेगा।

CAQM और स्वच्छ हवा की लड़ाई

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा 2020 में पिछले तदर्थ (ad-hoc) समितियों को बदलने के लिए एक शक्तिशाली वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी। इसके पास दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों के बीच समन्वय करने का जनादेश है।

वर्तमान विस्तार ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम’ (NCAP) के तहत एक बड़े राष्ट्रीय बदलाव का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2026 तक पार्टिकुलेट मैटर की सांद्रता में 20%–30% की कमी लाना है। एनसीआर को सेंसर से लैस करके, CAQM सिंधु-गंगा के मैदान जैसे अन्य प्रदूषित भारतीय क्षेत्रों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित कर रहा है।

सामाजिक-आर्थिक आवश्यकता

भारत में वायु प्रदूषण की आर्थिक लागत चौंकाने वाली है। ‘द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ’ के एक अध्ययन का अनुमान है कि 2019 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण 16.7 लाख मौतें हुईं, जिससे लगभग 36.8 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में, यह नुकसान स्वास्थ्य देखभाल खर्च, कम श्रम उत्पादकता और निर्माण व स्कूलों पर समय-समय पर लगने वाले “लॉकडाउन” के माध्यम से महसूस किया जाता है जो अर्थव्यवस्था को बाधित करते हैं।

साक्ष्य-आधारित नीति समर्थन प्रदान करके, विस्तारित CAAQMS नेटवर्क से इन नुकसानों को कम करने की उम्मीद है। वास्तविक समय का डेटा बेहतर स्वास्थ्य परामर्श जारी करने में मदद करता है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग जैसे संवेदनशील समूह प्रदूषण के चरम घंटों के दौरान जोखिम को कम कर सकें।

एक वैज्ञानिक प्रहरी की ओर

जैसे-जैसे 46 अतिरिक्त स्टेशन ऑनलाइन होंगे, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र प्रभावी रूप से 24/7 वैज्ञानिक निगरानी में रहेगा। CAQM ने दोहराया है कि प्रदूषण की प्रभावी रोकथाम के लिए यह सघन नेटवर्क “अत्यंत आवश्यक” है। लक्ष्य अब केवल यह रिकॉर्ड करना नहीं है कि हवा कितनी खराब है, बल्कि उस डेटा का उपयोग करके प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकना है।

हालांकि हार्डवेयर की स्थापना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, लेकिन असली परीक्षा इस डेटा को एक भविष्य बताने वाले एआई (AI) मॉडल में एकीकृत करने में होगी, जो प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर सके, जिससे आने वाले वर्षों में एनसीआर के लोग थोड़ी राहत की सांस ले सकें।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

/ Published posts: 377

अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

Instagram