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दिलों पर उकेरा गया नाम: देशमुख की विरासत पर विवाद

In Politics
January 06, 2026
RajneetiGuru.com - दिलों पर उकेरा गया नाम देशमुख की विरासत पर विवाद - Image credited by Hindustan Times

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के शोरगुल के बीच, दिवंगत नेता विलासराव देशमुख की विरासत को लेकर हाल ही में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण द्वारा किए गए एक चुनावी दावे से शुरू हुआ यह मामला, अभिनेता रितेश देशमुख और उनके भाई अमित देशमुख की भावनात्मक प्रतिक्रिया के बाद एक सार्वजनिक माफी पर जाकर थमा।

यह विवाद लातूर में देशमुख परिवार के गहरे प्रभाव को दर्शाता है, जो पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा स्थापित विकास के “लातूर पैटर्न” के कारण आज भी कांग्रेस का गढ़ बना हुआ है।

विवाद की शुरुआत: “यादें मिटा दी जाएंगी”

विवाद की चिंगारी सोमवार, 5 जनवरी 2026 को लातूर में एक भाजपा चुनावी रैली के दौरान भड़की। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए रवींद्र चव्हाण ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए कहा कि भाजपा समर्थकों का यह उत्साह एक नए युग की शुरुआत है।

चव्हाण ने भीड़ से कहा, “हर कोई अपने हाथ उठाकर भारत माता की जय कहे। वास्तव में, आपका उत्साह देखकर यह 100% सच लगता है कि इस शहर से विलासराव देशमुख की यादें मिटा दी जाएंगी, और इसमें कोई संदेह नहीं है।”

यह बयान 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों के लिए एक राजनीतिक भविष्यवाणी के तौर पर दिया गया था, लेकिन इसे उस नेता के अपमान के रूप में देखा गया जिन्होंने दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (1999-2003 और 2004-2008) के रूप में सेवा की थी।

पलटवार: ‘लिखा हुआ’ बनाम ‘उकेरा हुआ’

देशमुख परिवार की ओर से आई प्रतिक्रिया बेहद तीखी और भावनात्मक थी। रितेश देशमुख ने एक वीडियो संदेश जारी किया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बिना किसी का नाम लिए रितेश ने हाथ जोड़कर कहा:

“मैं हाथ जोड़कर कहता हूं कि जो लोग जनता के लिए जिए हैं, उनके नाम लोगों के दिलों पर उकेरे (कोरलेले) गए हैं। जो लिखा गया है उसे मिटाया जा सकता है, लेकिन जो उकेरा गया है उसे कोई नहीं मिटा सकता।”

उनके भाई और पूर्व मंत्री अमित देशमुख ने भी कड़ी निंदा करते हुए कहा, “रवींद्र चव्हाण और भाजपा से ऐसे बयानों की उम्मीद नहीं थी। किसी बाहरी व्यक्ति के आने और ऐसे बयान देने से लातूरकरों के दिलों से विलासराव जी की यादें नहीं मिटाई जा सकतीं।”

लातूर और विलासराव का रिश्ता

इस विवाद की गंभीरता को समझने के लिए लातूर के इतिहास को देखना जरूरी है। विलासराव देशमुख को एक छोटे से कस्बे को शिक्षा और औद्योगिक केंद्र में बदलने का श्रेय दिया जाता है। उनके नेतृत्व में “लातूर पैटर्न” शिक्षा के क्षेत्र में एक ब्रांड बन गया।

बाभलगांव के सरपंच से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक का उनका सफर लातूर की मिट्टी से जुड़ा रहा। उनके निधन के बाद भी, उनके बेटों अमित और धीरज देशमुख ने इस राजनीतिक विरासत को संभाला है।

सुलह: “एक दोस्त की माफी”

जनता के बीच बढ़ते गुस्से और विलासराव के प्रति सम्मान को भांपते हुए, रवींद्र चव्हाण ने अगले ही दिन माफी मांग ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं बल्कि विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना था।

चव्हाण ने कहा, “विलासराव देशमुख एक बड़े नेता थे। लेकिन अगर मेरे मित्र रितेश की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उनसे माफी मांगता हूं। इस बयान को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।”

विश्लेषण: 2026 के चुनावों में विरासत की ताकत

यह घटना भारतीय राजनीति में “विरासत के वोट” (Legacy Vote) की ताकत को रेखांकित करती है। हालांकि भाजपा ने हाल के निकाय चुनावों में महाराष्ट्र में बड़ी जीत दर्ज की है, लेकिन क्षेत्रीय नायकों के साथ जुड़े भावनात्मक संबंधों को तोड़ना आज भी एक बड़ी चुनौती है।

15 जनवरी को होने वाले मतदान से पहले, “उकेरी गई यादें” एक बार फिर चुनावी चर्चा का केंद्र बन गई हैं, जिससे यह साफ होता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में भावनाओं का स्थान बुनियादी ढांचे जितना ही महत्वपूर्ण है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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