भाजपा के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अभिनेता से नेता बने विजय (तमिलगा वेट्ट्री कज़गम – TVK के प्रमुख) पर तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी मंदिर विवाद में उनकी चुप्पी को लेकर कड़ा हमला किया है। अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि विजय “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” की राजनीति कर रहे हैं और संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर रुख न अपनाकर जनता का भरोसा खो रहे हैं।
यह विवाद मदुरै के पास तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित ‘दीपथून’ (पत्थर के स्तंभ) पर पारंपरिक ‘कार्तिकेय दीपम’ जलाने को लेकर है। यह स्थान सिकंदर बादशाह दरगाह के पास है। मद्रास उच्च न्यायालय की एक एकल पीठ ने वहाँ दीप जलाने का आदेश दिया था, लेकिन द्रमुक (DMK) सरकार, वक्फ बोर्ड और दरगाह अधिकारियों ने इसे अदालत में चुनौती दी है, जिससे मामला गर्मा गया है।
“एक पक्ष चुनें,” अन्नामलाई की सलाह
मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए अन्नामलाई ने विजय के उस बयान पर निशाना साधा जिसमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर ही बोलने की बात कही थी। अन्नामलाई ने कहा, “अगर कुछ गलत है, तो कहिए कि वह गलत है। अगर सही है, तो कहिए कि सही है। बीच में खड़े रहने के बजाय किसी एक पक्ष को चुनें।”
उन्होंने आगे कहा, “विजय ने पुडुचेरी में एक अल्पसंख्यक विधायक के लिए आवाज उठाई, लेकिन तिरुपरंकुंद्रम में बहुसंख्यकों की भावनाओं पर चुप रहे। यह कैसी राजनीति है कि जब लाखों भक्तों की आस्था का सवाल हो, तो आप मौन साध लें?”
कानूनी खींचतान और सार्वजनिक व्यवस्था
यह विवाद अब तमिलनाडु की राजनीति का एक बड़ा केंद्र बन गया है। दिसंबर 2024 की शुरुआत में, न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने मंदिर प्रशासन को दीप जलाने का निर्देश दिया था और सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों (CISF) के उपयोग का सुझाव दिया था। हालांकि, राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती देते हुए कहा कि यह आदेश एक “नई धार्मिक परंपरा” पैदा करने जैसा है जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
विषय की पृष्ठभूमि
तिरुपरंकुंद्रम भगवान मुरुगन के छह पवित्र निवास स्थानों में से एक है। यह पहाड़ी सदियों से हिंदू-मुस्लिम सद्भाव का प्रतीक रही है, जहाँ सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशाह दरगाह दोनों स्थित हैं। दीप जलाने के स्थान और रास्तों को लेकर कानूनी विवाद ब्रिटिश काल (1915–1931) से चला आ रहा है। वर्तमान में भाजपा इसे “सनातन रक्षा” के रूप में देख रही है, जबकि द्रमुक इसे सार्वजनिक व्यवस्था का मुद्दा बता रही है। विजय की नई पार्टी TVK के लिए यह विवाद एक बड़ी परीक्षा बन गया है।
