शनिवार सुबह भारतीय राजनीति के दो धुर विरोधी चेहरों—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी—के बीच एक दुर्लभ और सौहार्दपूर्ण मुलाकात देखने को मिली। यह मौका था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का, जब संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर देश के दिग्गज नेता उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करने एकत्र हुए थे।
संसद के प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस गरिमामय समारोह में एक ऐसा पल आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी प्रेरणा स्थल पहुंचे, उन्होंने वहां मौजूद नेताओं का अभिवादन किया। इसके बाद वे स्वयं राहुल गांधी के पास गए और संभवतः उनका कुशलक्षेम पूछा। इस दौरान राहुल गांधी भी मुस्कुराते हुए और सिर हिलाकर जवाब देते नजर आए।
राजनीतिक शिष्टाचार की एक झलक
यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों नेता अक्सर सदन और चुनावी रैलियों में एक-दूसरे पर तीखे हमले करते रहे हैं। लेकिन आज, महात्मा फुले की प्रतिमा के नीचे, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पर लोकतांत्रिक शिष्टाचार भारी पड़ता दिखा।
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश ने भी फुले को श्रद्धांजलि दी।
महात्मा ज्योतिबा फुले का योगदान
11 अप्रैल, 1827 को महाराष्ट्र के सतारा में जन्मे ज्योतिबा फुले ने अपना पूरा जीवन जाति व्यवस्था के उन्मूलन और महिलाओं की शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 1873 में ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (X) पर लिखा कि फुले के विचार सामाजिक प्रगति और न्याय की दिशा में हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस अवसर पर कहा:
“महात्मा फुले ने शिक्षा को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली माध्यम बनाया। उनका संघर्ष केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चेतना थी जिसने भारत की अंतरात्मा को नई दिशा दी।”
आज के दौर में जब राजनीतिक बहस अक्सर कटुता में बदल जाती है, ऐसे में प्रेरणा स्थल पर दिखा यह सौहार्द लोकतंत्र के लिए एक सुखद संकेत है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे राजनीतिक समीकरण बदलेंगे, लेकिन महापुरुषों की जयंती पर दिखाई गई यह एकजुटता देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करती है। ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन दिल्ली से आई यह तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चा में है।
