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छोटी जनजाति पर SIR सुनवाई का बोझ

In Politics
January 22, 2026
rajneetiguru.com - पश्चिम बंगाल की टोटो जनजाति और SIR सुनवाई का आर्थिक बोझ। Image Credit – The Indian Express

टोटोपाड़ा (पश्चिम बंगाल) — पश्चिम बंगाल की सबसे छोटी और विशिष्ट आदिवासी समुदाय टोटो जनजाति के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी अब एक भारी आर्थिक और सामाजिक बोझ बनती जा रही है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के तहत आयोजित सुनवाइयों में शामिल होने के लिए टोटोपाड़ा गांव के निवासियों को सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका प्रभावित हो रही है।

अलीपुरद्वार जिले के भारत-भूटान सीमा के पास स्थित टोटोपाड़ा गांव टोटो जनजाति का एकमात्र स्थायी निवास क्षेत्र है। इस समुदाय की आबादी कुछ हजार से अधिक नहीं मानी जाती है और इसकी आजीविका मुख्य रूप से खेती, पशुपालन और सीमित मजदूरी पर निर्भर है। ऐसे में SIR सुनवाई के लिए जिला या उपमंडल मुख्यालय तक बार-बार यात्रा करना उनके लिए आसान नहीं है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए सुनवाई में उपस्थित होना पड़ रहा है कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बना रहे। कई लोगों के लिए इसका अर्थ है — एक या दो दिन की मजदूरी का नुकसान, यात्रा का खर्च और परिवार से दूर रहना। एक टोटो निवासी ने सवाल उठाया,
“हम सुनवाई में जाते हैं ताकि वोट का अधिकार न छिने, लेकिन जो खर्च और नुकसान होता है, उसकी भरपाई कौन करेगा?”
यह सवाल इस पूरी प्रक्रिया की मानवीय कीमत को उजागर करता है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना और फर्जी या दोहरे नामों को हटाना है। यह प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता के लिए आवश्यक मानी जाती है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह प्रक्रिया असमान रूप से कठिन साबित हो रही है।

टोटो जनजाति को पहले ही भौगोलिक अलगाव, सीमित बुनियादी ढांचे और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का यह अतिरिक्त दबाव समुदाय की परेशानियों को और बढ़ा रहा है। कई बुजुर्ग और महिलाएं लंबी यात्रा करने में असमर्थ हैं, जिससे उनके नाम मतदाता सूची से कटने का डर बना रहता है।

एक सामाजिक कार्यकर्ता, जो वर्षों से टोटोपाड़ा में काम कर रहे हैं, ने कहा,
“लोकतंत्र में भागीदारी का अधिकार सबका है, लेकिन प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि सबसे कमजोर समुदायों को अतिरिक्त कीमत न चुकानी पड़े।”
उनका मानना है कि प्रशासन को स्थानीय स्तर पर सुनवाई या मोबाइल शिविर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार करना चाहिए।

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया ऐसे समय पर चल रही है जब चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं। राज्य में आदिवासी मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद, टोटो जैसी छोटी जनजातियों की विशिष्ट परिस्थितियों को नीति निर्माण में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।

इतिहास की बात करें तो टोटो जनजाति को वर्षों तक बाहरी दुनिया से लगभग अलग-थलग माना जाता रहा है। हाल के दशकों में सड़क और संचार सुविधाओं में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अब भी टोटोपाड़ा तक पहुंचना कठिन माना जाता है। ऐसे में एक केंद्रीकृत सुनवाई प्रणाली इस समुदाय के लिए व्यावहारिक नहीं दिखती।

चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिकों की सुविधा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यदि प्रक्रिया अत्यधिक बोझिल हो, तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी को हतोत्साहित कर सकती है, खासकर उन समुदायों में जो पहले से ही हाशिए पर हैं।

फिलहाल, टोटोपाड़ा के निवासी अपने अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए यह कठिन यात्रा करने को मजबूर हैं। उनके लिए यह केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पहचान और नागरिकता से जुड़ा सवाल बन चुका है। यह स्थिति नीति निर्माताओं के सामने यह अहम प्रश्न छोड़ती है कि लोकतंत्र की प्रक्रिया को सबसे छोटे और कमजोर समुदायों के लिए कैसे अधिक सुलभ बनाया जाए।

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  • नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
    दिल से एक कहानीकार, मैं हर क्लिक, हर स्क्रॉल और हर नए विचार में रचनात्मकता खोजता हूँ। चाहे दिल से लिखे गए शब्दों से जुड़ाव बनाना हो, कॉफी के साथ नए विचारों पर काम करना हो, या बस आसपास की दुनिया को महसूस करना — मैं हमेशा उन कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो असर छोड़ जाएँ।

    मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
    हमेशा सीखते रहना और आगे बढ़ना — यही मेरा जीवन और लेखन का मंत्र है।

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नमस्ते, मैं सब्यसाची बिस्वास हूँ — आप मुझे सबी भी कह सकते हैं!
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मुझे शब्दों, कला और विचारों के मेल से नई दुनिया बनाना पसंद है। जब मैं लिख नहीं रहा होता या कुछ नया सोच नहीं रहा होता, तब मुझे नई कैफ़े जगहों की खोज करना, अनायास पलों को कैमरे में कैद करना या अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए नोट्स लिखना अच्छा लगता है।
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