महाराष्ट्र के नासिक में एक प्रमुख बहुराष्ट्रीय आईटी फर्म यौन उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक धर्मांतरण के प्रयासों के गंभीर आरोपों से घिर गई है। इस मामले में एक वरिष्ठ एचआर मैनेजर सहित सात कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। यह मामला अब केवल एक कार्यस्थल की शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि एक उच्च-स्तरीय आपराधिक जांच में बदल गया है, जिसकी जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भी इसकी निगरानी की संभावना है।
13 अप्रैल, 2026 तक, नासिक शहर की पुलिस ने पुष्टि की है कि आठ व्यक्तियों के खिलाफ नौ अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई हैं। आरोपों में अनुचित यौन व्यवहार से लेकर हिंदू कर्मचारियों को व्यवस्थित तरीके से “ग्रूमिंग” प्रक्रिया के तहत गोमांस खाने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर दावे शामिल हैं।
स्टिंग ऑपरेशन: कैसे सामने आए आरोप
यह मामला मार्च 2026 के अंत में तब प्रकाश में आया, जब एक महिला कर्मचारी ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि एक विवाहित सहकर्मी ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया और उसकी धार्मिक भावनाओं का बार-बार अपमान किया।
इन दावों की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस ने एक गुप्त “स्टिंग” ऑपरेशन शुरू किया। महिला अधिकारियों ने नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के रूप में कंपनी परिसर में प्रवेश किया ताकि वहां की कार्यसंस्कृति को करीब से देख सकें। ऑपरेशन के दौरान, जांचकर्ताओं ने कई टीम लीडरों द्वारा अश्लील इशारों और पेशेवर दुराचार को खुद अपनी आंखों से देखा।
जबरन धर्मांतरण और “गोमांस” खिलाने के आरोप
इस मामले का सबसे विवादास्पद पहलू धार्मिक प्रताड़ना के आरोपों से जुड़ा है। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन, जो जांच की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, ने आरोप लगाया कि पीड़ितों को धार्मिक अनुष्ठान के लिए मजबूर किया गया था।
“जांच में एक परेशान करने वाला पैटर्न सामने आया है। पीड़ितों को कथित तौर पर नमाज पढ़ने और गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया। महिला कर्मचारियों सहित कुछ वरिष्ठ कर्मचारी औपचारिक शिकायतें मिलने के बावजूद मूकदर्शक बने रहे। यह एक सुनियोजित नेटवर्क प्रतीत होता है, और हम सुनिश्चित करेंगे कि इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून का सामना करे।” — गिरीश महाजन, मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
जांचकर्ताओं की रिपोर्ट बताती है कि कम से कम एक पुरुष और आठ महिला कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था।
नासिक आईटी फर्म जांच का अवलोकन (अप्रैल 2026)
एचआर की लापरवाही और आंतरिक विफलता
कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग की भूमिका गहन जांच के दायरे में है। एक वरिष्ठ एचआर मैनेजर, जिसे पुणे से गिरफ्तार किया गया, को सह-आरोपी बनाया गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई पीड़ितों ने उत्पीड़न का दस्तावेजीकरण करते हुए एचआर विभाग को ईमेल भेजे थे। आरोप है कि आंतरिक जांच शुरू करने के बजाय, एचआर प्रमुख ने पीड़ितों को “शांत रहने” की सलाह दी और इन घटनाओं को “बहुराष्ट्रीय निगमों में होने वाली सामान्य बात” बताकर खारिज कर दिया।
बढ़ते सार्वजनिक आक्रोश के जवाब में, आईटी दिग्गज—जिसे कई रिपोर्टों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) बताया गया है—ने रविवार, 12 अप्रैल को एक बयान जारी किया। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति रही है। जैसे ही हमें नासिक के मामले की जानकारी मिली, हमने तुरंत कार्रवाई की और जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया: “कॉर्पोरेट जिहाद” के दावे
इस घटना ने महाराष्ट्र में एक तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। भाजपा कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने इन घटनाओं को “कॉर्पोरेट जिहाद” करार दिया। वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन घटनाक्रमों को “चौंकाने वाला” और “अस्वीकार्य” बताया है। उन्होंने पुलिस को क्षेत्र के अन्य कॉर्पोरेट केंद्रों का ऑडिट करने का आदेश दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और इस तरह का शोषण तो नहीं हो रहा है।
आगे की राह
एसआईटी वर्तमान में एक शेष संदिग्ध, निदा खान की तलाश कर रही है, जो फिलहाल फरार है। नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न के अन्य पीड़ितों से सामने आने की सार्वजनिक अपील की है, और उन्हें गोपनीयता व सुरक्षा का आश्वासन दिया है। यह मामला भारत के बढ़ते प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यस्थल सुरक्षा कानूनों और धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण के लिए दूरगामी परिणाम वाला साबित हो सकता है।
