नई दिल्ली — भारत की विविध अमूर्त विरासत की रक्षा करने और अपने रचनात्मक समुदाय के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र प्रदान करने के लिए, संस्कृति मंत्रालय कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) को आक्रामक रूप से लागू कर रहा है। यह केंद्रीय क्षेत्र की एक ‘अम्ब्रेला’ योजना है जो देश भर के सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्राथमिक माध्यम है, जिसमें अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के कलाकारों के लिए विशेष सहायता भी शामिल है।
शुक्रवार को राज्यसभा में बोलते हुए, केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का विवरण दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक आर्थिक बदलावों के बावजूद, केएसवीवाई के लिए बजटीय आवंटन पर्याप्त बना हुआ है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि “भारत की आत्मा”—उसकी कला और संस्कृति—आधुनिक होती दुनिया में भी फलती-फूलती रहे।
रचनात्मक भारत के लिए निरंतर वित्त पोषण
केएसवीवाई एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका अर्थ है कि धन का प्रबंधन राज्य-वार कोटा में विभाजित करने के बजाय सीधे केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। इससे भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना योग्य सांस्कृतिक संस्थाओं को योग्यता के आधार पर सहायता दी जा सकती है।
| वित्त वर्ष | आवंटित धनराशि (₹ करोड़ में) | दी गई राशि (₹ करोड़ में) |
| 2022-23 | 214.32 | 213.76 |
| 2023-24 | 218.65 | 218.36 |
| 2024-25 | 207.24 | 201.67 |
आंकड़े बताते हैं कि धनराशि के उपयोग की दर बहुत अधिक है, जो भारतीय कलाकार बिरादरी के बीच सांस्कृतिक सब्सिडी और छात्रवृत्ति की भारी मांग को दर्शाता है।
अम्ब्रेला संरचना: जड़ों से बुनियादी ढांचे तक
केएसवीवाई कई लक्षित उप-योजनाओं के माध्यम से संचालित होती है, जिन्हें विभिन्न कलात्मक क्षेत्रों की अनूठी जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
1. गुरु-शिष्य परंपरा का पोषण
भारतीय शास्त्रीय कलाओं के केंद्र में पारंपरिक शिक्षक-शिष्य संबंध है। रिपर्टरी अनुदान के तहत नाटक, संगीत और नृत्य समूहों को मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके तहत, एक ‘गुरु’ को ₹15,000 प्रति माह मिलते हैं, जबकि 18 शिष्यों तक को उनकी उम्र और दक्षता के आधार पर ₹2,000 से ₹10,000 तक का वजीफा दिया जाता है।
2. सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण
कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए योजना बिल्डिंग ग्रांट प्रदान करती है।
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स्टूडियो थिएटर: एनजीओ और ट्रस्टों को ऑडिटोरियम, रिहर्सल हॉल बनाने या लाइट और साउंड सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए मेट्रो शहरों में ₹50 लाख और गैर-मेट्रो क्षेत्रों में ₹25 लाख तक मिल सकते हैं।
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टैगोर सांस्कृतिक परिसर (टीसीसी): बड़ी परियोजनाओं के लिए, सरकार रवींद्र भवनों जैसे प्रमुख सांस्कृतिक स्थानों के निर्माण या नवीनीकरण के लिए ₹15 करोड़ तक प्रदान करती है।
3. क्षेत्रीय विरासतों का संरक्षण
विशिष्ट भौगोलिक और धार्मिक परंपराओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है:
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हिमालयी विरासत: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के संगठनों को हिमालयी लोक कलाओं के संरक्षण के लिए सालाना ₹30 लाख तक मिलते हैं।
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बौद्ध/तिब्बती संस्कृति: एक समर्पित कोष बौद्ध परंपराओं के वैज्ञानिक विकास और अनुसंधान के लिए ₹1 करोड़ तक प्रदान करता है।
अनुभवी कलाकारों के लिए सामाजिक सुरक्षा
यह स्वीकार करते हुए कि कई कलाकारों को बुढ़ापे में वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, मंत्रालय 60 वर्ष से अधिक आयु के कलाकारों को ₹6,000 की मासिक पेंशन प्रदान करता है। इसके लिए कलाकार की वार्षिक आय ₹72,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए। एक मानवीय कदम के रूप में, कलाकार की मृत्यु के बाद यह लाभ उनके पति या पत्नी को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
विशेषज्ञ की राय: “संस्कृति केवल एक विलासिता नहीं है; यह राष्ट्रीय पहचान की रीढ़ है। अनुभवी कलाकारों का समर्थन करके और गुरु-शिष्य परंपरा को वित्त पोषित करके, केएसवीवाई यह सुनिश्चित करती है कि हमारा प्राचीन ज्ञान समय के साथ खो न जाए बल्कि डिजिटल पीढ़ी तक पहुंचे।” — डॉ. अरुणा शर्मा, सांस्कृतिक विश्लेषक।
सेवा भोज योजना: आध्यात्मिक जुड़ाव
केएसवीवाई का एक अनूठा घटक सेवा भोज योजना है। यह उप-योजना धर्मार्थ और धार्मिक संस्थानों (मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों, आश्रमों) द्वारा मुफ्त भोजन (लंगर/प्रसाद) परोसे जाने के लिए खरीदी गई कच्ची खाद्य सामग्री पर भुगतान किए गए केंद्रीय जीएसटी और आईजीएसटी की प्रतिपूर्ति करती है।
केएसवीवाई क्यों महत्वपूर्ण है?
कला संस्कृति विकास योजना को पिछले दशक में केवल प्रदर्शनों से आगे बढ़कर अनुसंधान, फेलोशिप और बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पुनर्जीवित किया गया था। भारत की युवा पीढ़ी तेजी से वैश्वीकृत मीडिया की ओर बढ़ रही है, ऐसे में केएसवीवाई युवा कलाकारों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोक रंगमंच को करियर के रूप में अपनाने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति (18-25 वर्ष) दो साल के लिए ₹5,000 मासिक प्रदान करती है, जो प्रशिक्षण और पेशेवर प्रदर्शन के बीच एक महत्वपूर्ण पुल के रूप में कार्य करती है।
गतिमान विरासत
केएसवीवाई केवल एक वित्तीय बहीखाता नहीं है; यह भारतीय पहचान के प्रति एक प्रतिबद्धता है। जैसा कि मंत्री शेखावत ने अपने जवाब में उल्लेख किया, मंत्रालय का ध्यान पारदर्शिता और यह सुनिश्चित करने पर बना हुआ है कि डिजिटल आवेदन प्रक्रियाओं के माध्यम से धनराशि इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचे।
