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कृष्णा करुणेश नोएडा के नए सीईओ नियुक्त: जनता में भारी आक्रोश

In Politics
January 24, 2026
RajneetiGuru.com - कृष्णा करुणेश नोएडा के नए सीईओ नियुक्त जनता में भारी आक्रोश - Image Credited by Times NOW

नोएडा — बढ़ते सार्वजनिक आक्रोश को शांत करने के उद्देश्य से एक त्वरित प्रशासनिक फेरबदल में, उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। 2011 बैच के ये अधिकारी लोकेश एम. का स्थान लेंगे, जिन्हें शहर में एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दुखद मृत्यु के बाद हुए तीव्र विरोध प्रदर्शनों के चलते अचानक हटा दिया गया और “प्रतीक्षा सूची” (waiting list) में डाल दिया गया।

नेतृत्व में यह बदलाव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के इस प्रमुख केंद्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जो प्रशासनिक उदासीनता, डेवलपर्स की लापरवाही और पुलिस की कथित मनमानी के आरोपों से जूझ रहा है।

मुख्य कारण: सेक्टर 150 की वह दुखद रात

करुणेश की नियुक्ति सीधे तौर पर 16 जनवरी, 2026 की घटनाओं से जुड़ी है। युवा टेक पेशेवर युवराज मेहता की जान तब चली गई जब उनकी कार कथित तौर पर सेक्टर 150 में एक जलस्रोत में गिर गई थी। इस घटना ने शहर के बुनियादी ढांचे और नए विकसित हो रहे क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया।

स्थानीय निवासियों और पीड़ित के परिवार ने आरोप लगाया कि उचित बैरिकेडिंग की कमी, खराब स्ट्रीट लाइटिंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी के कारण यह हादसा हुआ। नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसमें नागरिकों ने नेतृत्व से जवाबदेही की मांग की। 19 जनवरी को, जनता के विश्वास में आई भारी कमी को पहचानते हुए, राज्य सरकार ने लोकेश एम. को पद से हटा दिया।

प्रत्यक्षदर्शी का विवाद: सच बनाम स्क्रिप्ट

इस मामले की आग में घी डालने का काम 26 वर्षीय डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मोनिंदर सिंह की गवाही ने किया, जो घटनास्थल पर पहुँचने वाले पहले व्यक्ति थे। सिंह ने स्थानीय पुलिस के खिलाफ चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि उन पर “स्क्रिप्टेड” (पहले से लिखा हुआ) बयान देने के लिए दबाव डाला गया था।

सिंह ने दावा किया, “मुझे नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन बुलाया गया और एक वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया कि पुलिस ने मेहता को बचाने के लिए पानी में प्रवेश किया था। उन्होंने मुझे एक स्क्रिप्ट दी और मीडिया से दूर रहने को कहा। मैं डरा हुआ था, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि मैं इकलौता गवाह हूँ और मुझे सच के साथ खड़ा होना चाहिए।”

हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि सिंह “मीडिया या किसी से भी बात करने के लिए स्वतंत्र हैं,” लेकिन इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन की छवि को और अधिक नुकसान पहुँचाया है, जिससे नए सीईओ के लिए कार्यभार और भी कठिन हो गया है।

कौन हैं कृष्णा करुणेश?

मूल रूप से बिहार के निवासी, कृष्णा करुणेश नोएडा में प्रशासनिक अनुभव का एक विशाल भंडार लेकर आए हैं। इस नियुक्ति से पहले, उन्होंने गोरखपुर के जिलाधिकारी के रूप में कार्य किया, जो मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद है।

उनकी पिछली भूमिकाओं में शामिल हैं:

  • उपाध्यक्ष, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA)।

  • मुख्य विकास अधिकारी (CDO), गाजियाबाद।

  • जिलाधिकारी, हापुड़ और बलरामपुर।

जीडीए (GDA) में उनका कार्यकाल विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि वे शहरी नियोजन की जटिलताओं, बिल्डर-खरीदार विवादों और एनसीआर में बुनियादी ढांचे के विकास से अच्छी तरह वाकिफ हैं।

विशेषज्ञ विश्लेषण: आगे की चुनौतियाँ

शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना ​​है कि करुणेश की तत्काल प्राथमिकता शहर के “डार्क स्पॉट्स” (अंधेरे और असुरक्षित क्षेत्रों) का सुरक्षा ऑडिट करना होगा।

शहरी शासन के सलाहकार डॉ. अनिरुद्ध वर्मा कहते हैं, “नए सीईओ जनता के अविश्वास के बारूद के ढेर पर कदम रख रहे हैं। सेक्टर 150 जैसे क्षेत्रों में नोएडा का तीव्र विस्तार उसके सुरक्षा बुनियादी ढांचे से कहीं आगे निकल गया है। व्यवस्था बहाल करने के लिए करुणेश को डेवलपर हितों के बजाय ‘नागरिक प्रथम’ (Citizen First) दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी होगी।”

नोएडा प्राधिकरण का निरंतर संघर्ष

नोएडा प्राधिकरण (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) की स्थापना 1976 में शहर के विकास के प्रबंधन के लिए की गई थी। हालाँकि, हाल के वर्षों में इसे कई मुद्दों पर आलोचना का सामना करना पड़ा है:

  1. रुकी हुई आवासीय परियोजनाएं: डेवलपरों के दिवालिया होने के कारण हजारों खरीदार अभी भी अपने फ्लैटों का इंतजार कर रहे हैं।

  2. बुनियादी ढांचे में कमियां: पर्याप्त जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था या सड़क सुरक्षा के बिना तेजी से शहरीकरण।

  3. शासन में पारदर्शिता: बार-बार नेतृत्व परिवर्तन ने अक्सर दीर्घकालिक नीतियों के कार्यान्वयन में बाधा डाली है।

प्रभाव और भविष्य का दृष्टिकोण

कृष्णा करुणेश की नियुक्ति को राज्य सरकार द्वारा एक “डैमेज कंट्रोल” (नुकसान कम करने) के कदम के रूप में देखा जा रहा है। जैसे ही वे कमान संभालते हैं, शहर उनकी ओर बिल्डर-खरीदार गतिरोध को सुलझाने और यह सुनिश्चित करने के लिए देख रहा है कि युवराज मेहता जैसी त्रासदी दोबारा कभी न हो।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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