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उपेक्षा के चलते सामूहिक इस्तीफों से हिला नवसारी भाजपा संगठन

In Politics
February 17, 2026
RajneetiGuru.com - उपेक्षा के चलते सामूहिक इस्तीफों से हिला नवसारी भाजपा संगठन - Image Credited by The Indian Express

नवसारी — भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक नवसारी में पार्टी को तब बड़ा झटका लगा, जब जिला इकाई में सामूहिक इस्तीफों की लहर दौड़ गई। शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 से अब तक 5 नए सदस्यों सहित कुल 20 नेताओं ने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह उथल-पुथल उन आरोपों के कारण शुरू हुई है जिनमें कहा गया है कि पार्टी की हालिया नियुक्तियों में जलालपुर तालुका को व्यवस्थित रूप से किनारे कर दिया गया है।

यह असंतोष विशेष रूप से प्रभावशाली कोली पटेल समुदाय के बीच केंद्रित है, जो दक्षिण गुजरात की राजनीति में एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय भूमिका निभाता है। हालांकि नेताओं ने अपने आधिकारिक पदों से इस्तीफा दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे प्राथमिक पार्टी कार्यकर्ताओं के रूप में काम करना जारी रखेंगे। यह भगवा खेमे से पूर्ण अलगाव के बजाय प्रतिनिधित्व के लिए आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है।

असंतोष का कारण

यह संकट सोमवार, 9 फरवरी को नई जिला संगठनात्मक सूची की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद शुरू हुआ। टकराव तब चरम पर पहुंच गया जब जलालपुर के अशोक पटेल, जिन्हें नवसारी जिला भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, ने पिछले मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

पटेल का निर्णय जिला महासचिव के पद की मांग ठुकराए जाने के कारण लिया गया था। उनका मानना था कि उनकी वरिष्ठता और जलालपुर क्षेत्र के योगदान के अनुसार वे इस पद के हकदार थे। उनके बाद कई अन्य उच्च-स्तरीय पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए, जिनमें शामिल हैं:

  • विजय पटेल: महासचिव, बख्शी पंच मोर्चा।

  • प्रकाश पटेल: महासचिव, किसान मोर्चा।

  • चेतन पटेल: जिला संगठनात्मक सचिव और जलालपुर तालुका पंचायत सदस्य।

प्रतिनिधित्व के मुद्दे और सामुदायिक भावना

शिकायत का मुख्य केंद्र जिला निकाय में जलालपुर को “जगह और महत्व” न दिया जाना है। जलालपुर भाजपा का गढ़ है, जिसका प्रतिनिधित्व राज्य विधानसभा में आर.सी. पटेल करते हैं। वे लगातार छह बार के विधायक हैं और कोली पटेल समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

अपने अपराजित रिकॉर्ड और लंबे समय की वफादारी के बावजूद, समर्थकों का कहना है कि आर.सी. पटेल को राज्य मंत्रिमंडल या उच्च राज्य भाजपा संगठन में भूमिकाओं के लिए नजरअंदाज किया गया है। भाजपा के जलालपुर अध्यक्ष हितेश पटेल ने कार्यकर्ताओं की सामूहिक हताशा व्यक्त की:

“जिला भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में जलालपुर के नेताओं को महत्व या स्थान नहीं दिया गया है। महासचिव पद के लिए अशोक पटेल के अनुरोध को अनसुना कर दिया गया। यहां तक ​​कि हमारे विधायक आर.सी. पटेल को भी राज्य कैबिनेट में जगह नहीं मिली। लोगों में गहरा गुस्सा है और अधिक लोग इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।”

गुजरात की राजनीति में कोली पटेल कारक

कोली समुदाय गुजरात की आबादी का लगभग 24% है और यह 40 से अधिक विधानसभा सीटों पर निर्णायक कारक है, विशेष रूप से सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के तटीय क्षेत्रों में। नवसारी में भाजपा के चुनावी दबदबे के लिए इस समुदाय का समर्थन अनिवार्य है।

राजनीतिक विश्लेषकों का सुझाव है कि संगठनात्मक पदानुक्रम में इस समुदाय के नेताओं को किनारे करके, पार्टी एक ऐसा शून्य पैदा करने का जोखिम उठा रही है जिसका लाभ विपक्षी दल (विशेष रूप से कांग्रेस और आप) भविष्य के स्थानीय निकाय चुनावों में उठा सकते हैं।

दबाव में एक मजबूत गढ़

भाजपा के लिए नवसारी कोई साधारण जिला नहीं है; यह केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल का गृह क्षेत्र है, जिन्होंने 2022 में पार्टी को रिकॉर्ड तोड़ 156 सीटों पर जीत दिलाई थी। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा, जिन्होंने 2025 के अंत में पदभार संभाला था, अब इस हाई-प्रोफाइल जिले में अपनी पहली बड़ी आंतरिक संगठनात्मक चुनौती का सामना कर रहे हैं।

नवसारी के वर्तमान जिला अध्यक्ष भूरालाल शाह ने इस मुद्दे पर कूटनीतिक रुख अपनाया है। उन्होंने चयन प्रक्रिया का श्रेय प्रदेश नेतृत्व को देते हुए कहा, “विभिन्न पदों का निर्णय प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं द्वारा परामर्श प्रक्रिया के आधार पर लिया जाता है। हम इस मुद्दे को देख रहे हैं और इन नेताओं को अपना मन बदलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

आगे की राह

चूंकि भाजपा नेतृत्व ‘डैमेज कंट्रोल’ (नुकसान की भरपाई) की कोशिश कर रहा है, इसलिए ध्यान इस बात पर है कि क्या राज्य आलाकमान असंतुष्ट नेताओं को जगह देने के लिए संगठनात्मक सूची में बदलाव करेगा। “पन्ना प्रमुख” स्तर के अनुशासन पर गर्व करने वाली पार्टी के लिए, नवसारी जैसे प्रमुख जिले में कलह का ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन उसके संगठनात्मक ढांचे में एक दुर्लभ दरार की तरह है।

Author

  • Anup Shukla

    अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है।

    अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

    उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है।
    उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

    राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है —

    स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण,

    ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग,

    जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन,

    रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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अनूप शुक्ला पिछले तीन वर्षों से समाचार लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे मुख्य रूप से समसामयिक घटनाओं, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़ी खबरों पर गहराई से लिखते हैं। उनकी लेखन शैली सरल, तथ्यपरक और पाठकों से जुड़ाव बनाने वाली है। अनूप का मानना है कि समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने का माध्यम है। यही वजह है कि वे हर विषय को निष्पक्ष दृष्टिकोण से समझते हैं और सटीक तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और जनसमस्याओं जैसे कई विषयों पर प्रकाश डाला है। उनके लेख न सिर्फ घटनाओं की जानकारी देते हैं, बल्कि उन पर विचार और समाधान की दिशा भी सुझाते हैं। राजनीतिगुरु में अनूप शुक्ला की भूमिका है — स्थानीय और क्षेत्रीय समाचारों का विश्लेषण, ताज़ा घटनाओं पर रचनात्मक रिपोर्टिंग, जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लेखन, रुचियाँ: लेखन, यात्रा, फोटोग्राफी और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा।

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