देश के रणनीतिक भविष्य का खाका खींचते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शुक्रवार को घोषणा की कि भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के अपरिवर्तनीय पथ पर है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने जो “गति और रफ्तार” पकड़ी है, वह इतनी शक्तिशाली है कि अब देश “ऑटोपायलट” पर भी विकसित होकर रहेगा।
हालांकि, डोभाल के भाषण का मुख्य केंद्र आर्थिक विकास नहीं, बल्कि उस विकास को संभालने के लिए आवश्यक नेतृत्व की गुणवत्ता थी। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि विकसित भारत की कमान संभालने वाली पीढ़ी की “इच्छाशक्ति” और “निर्णय लेने की क्षमता” कितनी मजबूत है।
‘ऑटोपायलट’ और नेतृत्व की चुनौती
एनएसए की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र और आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, वैश्विक मंदी के बावजूद भारत की विकास दर 6.6% से 7.4% के बीच रहने की उम्मीद है। इसी संरचनात्मक मजबूती को डोभाल ने “ऑटोपायलट” शब्द से परिभाषित किया।
डोभाल ने कहा, “भारत निश्चित रूप से उस गति से विकसित होगा जो पीएम मोदी ने तय की है। भले ही यह ऑटोपायलट पर चले, फिर भी यह विकसित होगा। लेकिन असली सवाल यह है: इस विकसित भारत का नेतृत्व कौन करेगा? वे कितने सक्षम होंगे?”
वैश्विक संघर्षों पर चिंतन: मनोबल ही असली ताकत
डोभाल ने अपने संबोधन में वर्तमान वैश्विक स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हिंसा के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी देश के मनोबल को तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं। उनकी ये बातें 3 जनवरी, 2026 को वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व) जैसी हालिया घटनाओं के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
“हम युद्ध क्यों लड़ते हैं? हम कोई मनोविकृत (psychopaths) नहीं हैं जिन्हें दुश्मन की लाशें देखकर खुशी मिलती है… युद्ध किसी देश के मनोबल को तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं, ताकि वह हमारी शर्तों को स्वीकार कर ले,” अजीत डोभाल ने समझाया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी देश के पास आधुनिक हथियार और संसाधन हैं लेकिन मनोबल नहीं है, तो सब कुछ बेकार है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: विकसित भारत @2047
विकसित भारत @2047 भारत सरकार का एक विजन है, जिसका लक्ष्य स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक भारत को 30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
विकास यात्रा के मुख्य पड़ाव:
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2026-27: 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य।
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2030: दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना।
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2047: एक उच्च आय वाला विकसित राष्ट्र।
निष्कर्ष: युवाओं के लिए संदेश
अपने भाषण के समापन पर एनएसए ने पिछले 10 वर्षों के नेतृत्व की प्रशंसा की और युवाओं से अपील की कि वे केवल विकास के दर्शक न बनें, बल्कि इसके निर्माता बनें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक गति अब एक ऐतिहासिक सच्चाई है, लेकिन देश की आत्मा और शक्ति उसके भविष्य के नेताओं के चरित्र से परिभाषित होगी।
