मेरे बयान को सियासत से जोड़ना ठीक नहीं: कुशवाहा

बिहार की सियासत पूरी तरह गरमाई हुई है, सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता अपने बयानों से आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीतिक दांव खेल रहे हैं। हालांकि, एनडीए और विपक्षी महागठबंधन में सीटों के बंटवारे के लिए अभी कोई ठोस बातचीत नहीं हुई है लेकिन घटक दल इसको लेकर दबाव बनाने में जुटे हुए हैं।
इन सब के बीच आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के खीर वाले बयान पर एक बार फिर सूबे के राजनीति में भूचाल आ गया है। वैसे रालोसपा अध्यक्ष ने सफाई देते हुए कहा कि किसी समाज या दल के बारे में बात नहीं की, हमने समाज से कहा सभी साथ आएं। कुशवाहा ने कहा कि हमने न किसी से दूध मांगा न चीनी, हमने किसी पार्टी के बारे में बात नहीं की। कुशवाहा ने कहा कि 2019 में नरेन्द्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे और ज्यादा से ज्यादा सीटें एनडीए को मिलेंगी। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि खीर वाले बयान को किसी जाति विशेष या समूह और राजनीतिक पार्टी के साथ ना जोड़ें। इस बयान का मतलब सामाजिक सौहार्द से है। इसको किसी भी चीज के साथ जोड़ कर ना देखें।
बता दें कि रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि यदुवंशी (यादव) की दूध और कुशवाहा का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया होगा। इससे आगे बढ़ते हुए उन्होंने अन्य पिछड़ी जातियों को पंचमेवा और सवर्णों को चीनी बताया था।

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