दल तो मिल गए, दिल नहीं मिले अबतक

-झामुमो अध्यक्ष ने क्यों कहा...कांग्रेस भरोसे के लायक नहीं

कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तो साथ आने की तस्वीरें खिंचवा ली. गठबंधन भी हो गया. यह भी तय हो गया कि झामुमो नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ा जायेगा. यह भी तय हो गया कि राज्यसभा उम्मीदवार कांग्रेस का होगा, झामुमो उसे सपोर्ट करेगा. राजद भी इस गठबंधन का सारथी बन गया. यहाँ तक तो सब कुछ आदर्श गठबंधन सा लग रहा है, जो अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा को झारखण्ड की सत्ता से बेदखल करके ही मानेगा. लेकिन क्या सब कुछ ऐसा ही है जो मीडिया के सामने मुस्कुरा कर कहा जा रहा है! या कुछ है, जिसकी पर्दादारी है.

अगर सब कुछ इतना ही सामान्य है तो जब दिल्ली में हेमंत सोरेन राहुल गाँधी के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, उसी समय झामुमो के अध्यक्ष शिबू सोरेन रांची में पत्रकारों से यह क्यों कह रहे थे कि कांग्रेस भरोसे के लायक पार्टी नहीं है. जो कुछ तय हुआ है, उसे लिखित में लाओ. गुरूजी ने यहाँ तक कह दिया कि कांग्रेस ने पहले भी उसे धोखा दिया है. अगर झामुमो सुप्रीमो को ही कांग्रेस और गठबंधन की शर्तों पर इतना अविश्वास है तो इस गठबंधन का खुदा ही मालिक.

गुरु जी के पलटवार से कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े होते हैं. पहला कि किन शर्तों पर गठबंधन हुआ है! कितनी सीटें झामुमो अपने पास रखेगा और कितनी सहयोगियों को देगा! राज्यसभा में कांग्रेस का प्रत्याशी कौन धन्नासेठ हैं, जिनके नाम पर झामुमो बसंत सोरेन की राजनीतिक बलि चढाने को तैयार हो गया! राजद को कितनी सीटें मिलेगी! आनेवाले दिनों में मासस जैसे दल और अगर झाविमो गठबंधन में शामिल हुआ तो उनके लिए कितनी सीटें छोड़ी जाएँगी! ऐसे कई प्रश्न हैं, जिनका जवाब पाए बिना गठबंधन की बुनियाद कमजोर ही रहेगी.

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