मुझे पार्टी से बाहर फेंक कर तो दिखाएं नीतीश

जनता दल यूनाइटेड अब नीतीश कुमार और शरद यादव कैंप में बंटती दिख रही है। नीतीश कुमार के खिलाफ लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए पार्टी नेता शरद यादव का बागी रुख आज भी 'जन अदालत सम्मेलन' में देखने को मिला। उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का बहिष्कार तो किया ही साथ ही जेडीयू के फैसले पर भी निशाना साधा, शरद यादव ने कहा कि जनता ने हमें पांच साल के लिए जनादेश दिया था जिसमें हमारी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस जैसी पार्टियां थीं। फिर दूसरे दलों से हाथ क्यों मिलाया गया। शरद ने कहा कि महागठबंधन पांच साल का वादा था और इसलिए जनता ने हमें अमानत दी थी, घोषणापत्र दलों का ईमान होता है और कुछ लोगों ने यह ईमान खो दिया।

शरद यादव जहां खुद को अब भी महागठबंधन का हिस्सा बता रहे हैं। वहीं कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित अपने 'जन अदालत सम्मेलन' में शरद यादव ने कहा कि महागठबंधन टूटने के बाद से ही मैं पूरे देश का दौरा कर रहा हूं। देश आज मुश्किल हालात में है। बिहार में बाढ़ के हालात बेहद खराब हैं। हजारों किसान खुदकुशी कर रहे हैं। लोगों को धर्म और लव जिहाद के नाम पर मारा जा रहा है। ये तो आज देश के हालात हो गया है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में आज बेरोजगारी चरम पर है। युवाओं के पास काम नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में 2 करोड़ नौकरियों का वादा किया था, लेकिन उस पर कुछ नहीं किया।

नीतीश कुमार पर प्रहार करते हुए शरद यादव ने कहा कि मैंने यह पार्टी खड़ी की और अब लोग (नीतीश खेमा) कह रहे हैं कि ये पार्टी मेरी नहीं। बिहार में महागठबंधन तोड़ना सही नहीं था। वो मुझे और जेडीयू के दूसरे नेताओं को पार्टी को बाहर फेंक कर तो दिखाएं। शरद यादव ने कहा कि मैं किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि बिहार के लोगों के साथ हूं। बिहार के लोग दुखी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सम्मेलन में शामिल नेताओं से कहा कि जो भी मंच पर बोले आए वे किसी का नाम लिए बिना ही अपनी बात रखें।

वहीं शरद यादव का खुला समर्थन कर रहे आरजेडी सुप्रीमो ने कहा कि यह जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी नहीं, बीजेपी की है। उन्होंने कहा कि सृजन घोटाले में घिरने के चलते नीतीश कुमार और सुशील मोदी खुद को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी के आगे नाक रगड़ रहे हैं।

दरअसल जेडीयू से बागी हुए शरद यादव को जिस तरह से 'साझी विरासत बचाओ सम्मेलन' में विपक्ष का समर्थन मिला, उससे उनके हौसले बुलंद हैं। इसी वजह से शरद ने नीतीश कुमार के आवास पर हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल न होकर पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में अपनी अलग बैठक बुलाई।

हालांकि इस पर जेडीयू नेता केसी त्यागी कहते हैं कि नीतीश कुमार को सभी 15 राज्य इकाइयों का समर्थन प्राप्त है। शरद यादव चुनाव आयोग जा रहे हैं तो जायें, पूरी पार्टी नीतीश कुमार के साथ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि शरद यादव को कांग्रेस और भ्रष्ट आरजेडी गुमराह कर रही है, वे ही समांतर बैठक के लिए उनकी मदद कर रही है।

दरअसल शरद यादव अब इंतजार कर रहे हैं कि नीतीश कुमार पार्टी से बगावत के बाद उन्हें कब बाहर का रास्ता दिखाते हैं। सूत्रों की मानें तो उसके बाद शरद यादव चुनाव आयोग में जेडीयू का असली उत्तराधिकारी होने का वैसे ही दावा पेश करेंगे, जैसे मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी पर अपने वर्चस्व को लेकर चुनाव आयोग में दावा किया था। इसमें फर्क सिर्फ इतना है कि जब मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी पर अपने वर्चस्व का दावा किया था, तब कांग्रेस मुलायम सिंह यादव के खिलाफ और अखिलेश यादव के पक्ष में खड़ी थी और आखिर में फैसला अखिलेश यादव के पक्ष में आया था, लेकिन इस बार कांग्रेस शरद यादव के साथ और नीतीश कुमार के खिलाफ खड़ी होगी। इतना तय है कि आने वाले दिनो में कांग्रेस शरद यादव के कंधों का इस्तेमाल करके नीतीश कुमार को निशाना बनाएगी और बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगी।

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