‘किसी भी व्यक्ति की निजता पर हमला है धारा 377’

पिछले कई वर्षों से समलैंगिकता को लेकर पूरे देश में बहस हो रही है, प्रबुद्ध समाज इसको लेकर मंथन कर रहा है। कई मंचों पर ये सवाल किया गया है कि भारतीय समाज में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में क्यों रखा जाना चाहिए। इस मसले पर अब आरएसएस से जुड़े बुद्धिजीवियों, विचारिकों का मानना है कि धारा 377 जैसे कानून को खत्म करना चाहिए। साथ ही इसमें संबंधों का निषेध अवयस्कों और अन्य जीवों तक सीमित किया जाना चाहिए।

आरएसएस से जुड़े संगठन इंडिया फाउंडेशन ने पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के कसौली में दो दिन के युवा विचार शिविर का आयोजन किया था। इस शिविर में आरएसएस और बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

युवाओं के इस कार्यक्रम में धारा 377 पर चर्चा हुई और इस मुद्दे पर काफी प्रगतिशील ढंग से मंथन हुआ। इस कार्यक्रम में कहा गया कि धारा 377 जैसे कानून व्यक्ति की निजता पर हमला करते हैं इसलिए इन्हें खत्म किया जाना चाहिए।

इंडिया फाउंडेशन के इस दो दिवसीय कार्यक्रम में युवाओं ने संघ के प्रस्ताव के साथ-साथ हमसफर ट्रस्ट और नाज़ फाउंडेशन की पेटिशंस का भी अध्ययन किया और चर्चा के बाद नतीजे पर पहुंचे कि निजता पर हमला सही नहीं है।

कार्यक्रम में कहा गया कि भारत के इतिहास को देखें तो ऐसे कई उदाहरण मिल जाते हैं जिनसे साबित होता है कि दो वयस्कों के बीच संबंधों की व्याख्या बाइबिल जैसी नहीं है। हम एक खुले समाज और विचार के साथ जीते आए हैं। खजुराहो हो या ऐसे और भी कई उदाहरण, भारतीय समाज लोगों के चयन और संबंधों को जगह देता आया है। समलैंगिकता व्यक्ति की निजता के दायरे में आता है इसलिए इसमें बिना कारण रोकटोक या पाबंदी उचित नहीं मानी जा सकती। हां, समलैंगिकता को देखने और समझने का पश्चिमी मॉडल या उसके इर्द-गिर्द का अनावश्यक प्रचार भी उचित नहीं है।

दो दिन के इस शिविर में संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल और बीजेपी के महासचिव राम माधव मौजूद थे। शिविर में कश्मीर में शांति, आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। शिविर में बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं में रूपा गांगुली, अनुराग ठाकुर, पेमा कंडू, शौर्य डोवाल सहित कई अन्य लोग भी मौजूद थे।

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