बालू ने लालू को दे दी पॉलिटिकल संजीवनी

-राजद का बिहार बंद और सरकार की सियासी गलतियां

21 दिसम्बर का सफल बिहार बंद क्या लालू को सियासी संजीवनी दे गया! क्या राज्य सरकार ने सियासी तौर पर बड़ी तकनीकी गलती कर राजद को छक्का जड़ने के लिए आसान सियासी पिच दे दिया. क्या बिहार सरकार ने बालू की किल्लत से उपजे हाहाकार को समझने में गलती कर दी. कम से कम राजद के बिहार बंद को मिले जन समर्थन को देखते हुए कुछ ऐसा ही लग रहा है.

पहले बंद की कुछ दृश्य की चर्चा. राजधानी पटना एक तरह से बाहर से लॉक था. ना बाहर से गाड़ियाँ आ रही थी और ना ही बाहर जा रही थी. नवादा में एन एच 31 जाम रहा. मुंगेर और जमालपुर में रोड ब्लाक थे. मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा में रोड ब्लाक थे. हिलसा बाज़ार में हिंसक झड़प. आरा–सासाराम स्टेट हाईवे जाम. कोइलवर पुल जाम. सीमांचलऔर कोसी के सभी जिले और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम. लखीसराय और भागलपुर तथा इससे सटे बांका में ट्रेन तक रोकी गयी. कोई भी ऐसा जिला नहीं, जहां लोगों ने रोड ब्लाक न किया हो. ऐसा अरसे बाद देखा गया कि राजद के किसी कार्यक्रम को ऐसा जन समर्थन मिला हो.

राजनीतिक जानकार कहते हैं की यह लोगों का गुस्सा था, जिसे समय रहते राजद ने भांप लिया और इस गुस्से की सियासत को अपने समर्थन में मोड़ लिया. बंद के ठीक एक दिन पहले सरकार ने डैमेज कण्ट्रोल की कोशिश की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

आखिर इतनी बड़ी रणनीतिक चुक हुई कैसे! इसके बारे में कुछ जानकार कहते हैं कि सरकार ने जिसे केवल बालू और गिट्टी का मामला समझा था, उसकी चपेट में लाखों मजदूर, राज मिस्त्री, ट्रांसपोर्टर, सीमेंट और छड के कारोबारी सब आ गए. एक तरह से बिहार की रूरल और सेमी अर्बन इकॉनमी इसकी चपेट में आ गयी और एनडीए के समर्थक भी परेशान हो गए. इसने राजद को गुस्से से भरा बना बनाया मंच दे दिया.

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *