गोमिया और सिल्ली में बहुत कुछ दांव पर

गोमिया और सिल्ली के नतीजे झारखण्ड की भविष्य की राजनीति को गहरे तौर पर प्रभावित करेंगे. तीन प्रमुख दलों की राजनीति, एनडीए के घटक दलों के रिश्ते और विपक्षी गठबंधन का असर इन दोनों ही उपचुनावों में साफ़ साफ़ दिखेगा. सबसे पहले बात सिल्ली की. यहाँ आजसू प्रमुख सुदेश महतो खुद चुनाव लड़ रहे हैं. उनके सामने हैं पूर्व विधायक अमित महतो की पत्नी और पूरा विपक्ष, सीमा महतो केवल नाम की प्रत्याशी हैं, पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस के सभी बड़े नेता, झाविमो के नेता और सभी वामपंथी नेता सुदेश महतो को हराने में जुटे हैं. हेमंत सोरेन चाहते हैं कि किसी भी तरह सुदेश महतो को उन्हीं के घर में घेरा जाये. सभी नेता प्रचार के दौरान अपनी अपनी जीत के दावे भी कर रहे हैं.

सिल्ली सुदेश महतो की जन्म और कर्मस्थली रही है. सिर्फ एक चुनाव छोड़कर वो लगातार यहां से जीतते रहे हैं. सिल्ली में प्रवेश करते ही विकास की हरियाली दिखती है. लोग बताते हैं कि सब कुछ सुदेश महतो ने कराया है. सुदेश के समर्थक उनकी जीत को लेकर आश्वस्त दिखते हैं. कुछ पंचायतों को छोड़ दें तो हर जगह सुदेश महतो के लिए मजबूत समर्थन भी दिखता है.

सुदेश महतो को यहां तीन तरफ से घेरने की कोशिश हो रही है. विपक्ष के अलावा भाजपा सांसद भी अपने लोगों को कुछ दूसरा ही इशारा दे रहे हैं. कुछ लोग कहते हैं कि इस तरह भितरघात करने से तो बेहतर था, भाजपा सीधे सीधे सुदेश महतो के खिलाफ लड़ लेती. भाजपा के भितरघात से दुखी लोगों की सहानुभूति सुदेश के साथ दिखती है. अब यहाँ लड़ाई बेहद दिलचस्प हो चुकी है. सुदेश महतो की जीत के बाद आजसू और अधिक हमलावर हो सकता है. उनकी हार आजसू पार्टी के केडर को हताश करेगी.

गोमिया में झामुमो प्रत्याशी पहले आगे दिख रहे थे, लेकिन भाजपा ने माधवलाल सिंह को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है. यहां आजसू अपने कार्यकर्ताओं को इकठ्ठा रखने की लगातार कोशिश कर रहा है. समर्पित कार्यकर्ताओं की वज़ह से जमीन पर आजसू और भाजपा यहां मजबूत हैं. पिछले चुनाव में आजसू कार्यकर्ताओं की वज़ह से ही योगेन्द्र महतो चुनाव जीत पाए थे, क्योंकि वह आजसू के ही थे. इस बार योगेन्द्र महतो ने अपने दम पर संगठन को खड़ा करने की कोशिश की है, लेकिन इनका अति आत्मविश्वास इनके लिए परेशानी खड़े कर सकता है. यहां झामुमो का कोई खास प्रभाव नहीं है, आजसू प्रत्याशी लम्बोदर महतो सरकारी सेवा में थे, उन्होंने कुछ जगहों पर अपना प्रभाव बढ़ाया है लेकिन भाजपा का बूथ प्रबंधन सब पर भारी है. खुद मुख्यमंत्री लगातार गोमिया में घूम रहे हैं. यादव प्रभाव वाले इलाकों में आवास बोर्ड के अध्यक्ष जानकी यादव घूम रहे हैं.

कुल मिलकर इन उपचुनावों में जहाँ भाजपा और मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रतिष्ठा दांव पर है, वहीँ विपक्षी गठबंधन की भी पहली अग्नि परीक्षा अभी ही होनी है.

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