आर्थिक आधार पर आरक्षण का मुद्दा गरमाया

बिहार में जब से नीतीश कुमार ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी आरक्षण की बात कही है तब से यह सवाल लगातार चर्चा में है. कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की वकालत की है. यह मुद्दा इतना तूल पकड़ रहा है कि खुद भाजपा कार्यालय में युवाओं ने मंत्री तक का घेराव किया. वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी ठाकुर ने तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कटाक्ष भी किया. उन्होंने कहा क्यों नहीं मुख्यमंत्री रोड पर चलने में भी आरक्षण तय कर देते हैं.

इस सवाल पर शिवसेना के बिहार प्रभारी कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि हर जाति में गरीब हैं और सामाजिक समरसता कायम रखने के लिए आरक्षण का आधार आर्थिक ही होना चाहिए. जन क्रांति दल के राष्ट्रीय महासचिव आर डी मिश्रा भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की वकालत करते हैं. वह कहते हैं आरक्षण का जो पैमाना वर्तमान में है, उसकी समीक्षा की जरूरत है.

इधर अखिल भारतीय अपराध विरोधी मोर्चा ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की वकालत की है. मोर्चा के अध्यक्ष धनवंत सिंह राठौर के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं ने इस विषय पर शपथ भी लिया. राठौर ने कहा कि सभी जाति के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए, तभी समाज का विकास संतुलित दिशा में होगा. इस विषय पर 17 दिसंबर को गर्दनीबाग में विशाल धरना का कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इस धरना में शामिल होने के लिए पूरे राज्य में अभियान चल रहा है. राष्ट्रवादी जन कांग्रेस ने भी बिहटा स्थित सहजानंद सरस्वती के समाधि स्थल से आक्रोश मार्च निकालकर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग की. राष्ट्रवादी जन कांग्रेस के अध्यक्ष शंभू नाथ सिन्हा ने कहा कि हर तबके के गरीब को आरक्षण मिलना चाहिए.

 

राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के प्रभारी अभिषेक मिश्र ने भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग उठाई है. उन्होंने कहा परिषद देश के ऐसे सभी संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहा है, जो आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं. कुल मिला कर देखा जाए तो आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग का मसला तूल पकड़ रहा है. हर दल में इस विषय पर दो अलग-अलग धाराएं दिख रही हैं. पप्पू यादव ने भी कुछ दिन पहले आरक्षण का आधार आर्थिक करने की मांग की थी. ऐसे में जल्द ही अगर कोई बड़ा आंदोलन बिहार की सियासत में दिखे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.

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