राहुल तलाश रहे तारणहार

-नरेंद्र मोदी के मिशन 2019 के विजय रथ को रोकने की तैयारी

कांग्रेस कहीं इतिहास न बन जाए इसके लिए राहुल गांधी खास रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नए सहयोगियों की तलाश में फूंक-फूंककर कदम उठा रही है। नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोकने की इस लड़ाई में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को भावी सहयोगी के रूप में देख रहे हैं। राहुल गांधी युवा पीढ़ी को रिझाकर अगले लोकसभा चुनाव में अपनी नैया पार करने की सोच रहे हैं, हालांकि यहां इन संभावित सहयोगियों खासकर तेजस्वी और अखिलेश पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप उनकी राह में रोड़ा बन सकते हैं।

कांग्रेस और भाजपा के बीच 7 राज्यों में सियासी लड़ाई शुरू हो गई है। इनमें 6 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। साथ ही पंजाब में एक लोकसभा सीट और 4 नगर निगमों के लिए चुनाव होने हैं। इस साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं तथा अगले साल अप्रैल महीने में कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सियासी पंडित इन चुनावों को 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस और भाजपा के बीच सेमीफाइनल के तौर पर देख रहे हैं। जिन 6 विधानसभाओं के लिए आगामी 18 महीनों में चुनाव होने हैं उनमें 4 विधानसभाओं में भाजपा की सरकारें हैं और हरेक स्टेट के अपने मुद्दे हैं। इन राज्यों में कांग्रेस को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल पहले से ही कांग्रेस के साथ हैं, जबकि यूपीए सरकार में सहयोगी रही डीएमके को दोबारा रिझाने की कांग्रेस की कोशिश इस जून महीने में डीएमके सुप्रीमो एम करुणानिधि के 94वें जन्मदिन के मौके पर दिखी, जब राहुल गांधी चेन्नई पहुंचे थे।

हम आपको बताते हैं कि क्या ये तीनों चेहरे( अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और स्टालिन) कांग्रेस की नैया पार लगा सकेंगे। जहां तक यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की बात है तो वे युवा हैं, उनकी छवि भी बेहतर है। लेकिन गाहे -बगाहे सपा परिवार के अंदर का घमासान सामने आ ही जाता है।
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव युवा हैं। तेजस्वी लगातार रैलियों के द्वारा अपने खिलाफ कार्रवाई को एक दिशा दे सकते हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वो किस तरह से अपना बचाव कर सकेंगे ये देखना होगा। तेजस्वी यादव हर एक दिन एनडीए सरकार पर निशाना साध रहे हैं लेकिन अपने खिलाफ लगाए आरोपों पर कुछ भी साफ कहने से बचते हैं। इसके अलावा बिहार की मौजूदा सरकार नए तथ्यों के साथ आरोप लगा रही है। ऐसे में राहुल गांधी का जनसामान्य के सामने अपने पक्ष को रखना आसान नहीं रहेगा।स्टालिन का जिक्र करने पर करुणानिधि का चेहरा सामने नजर आने लगता है। स्टालिन पर भी सीधे -सीधे भ्रष्टाचार के मामले नहीं हैं। लेकिन दयानिधि मारन और कनिमोझी के कारनामों को किस तरह से तर्कसंगत ठहराया जा सकता है। ये न सिर्फ स्टालिन बल्कि राहुल गांधी के लिए भी कठिन होगा।

हालांकि गौर करने वाली बात यह भी है कि आरजेडी और सपा प्रमुख के अलावा डीएमके पर भी भ्रष्टाचार के ढेरों आरोप हैं। पार्टी प्रमुख करुणानिधि के पोते दयानिधि मारन पर पूर्व की यूपीए-1 सरकार में टेलीकॉम मंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगे। वहीं करुणानिधि की बेटी कणिमोझी और पार्टी नेता ए राजा को 2 जी स्कैम के आरोप में जेल जाना पड़ा था।

इसलिए राहुल का दायित्व बनता है कि वह विपक्षी दलों को केन्द्र सरकार के खिलाफ इकट्ठा करे और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए नए सहयोगियों की तलाश में फूंक-फूंककर कदम उठाये।

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