क्या रघुवर को मिलेगा अभयदान!

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 15 सितंबर को रांची आ रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास से लेकर पार्टी के बड़े से बड़े और कार्यकर्ता रेस हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष मिशन 2019 की तैयारी में जुटे हैं। रांची दौरा इसी क्रम में एक पड़ाव भर है। पर बात सिर्फ इतना भर नहीं है। पार्टी में कई और कयास लगाये जा रहे हैं। जैसा कि गाहे- बगाहे कई मौकों पर देखा गया है। कई बार पार्टी के बड़े नेताओं ने खुलेआम सरकार के कामकाज के खिलाफ बोला है। विपक्ष से भी तीखा प्रहार किया है।

देखा जाय तो मुख्यमंत्री की कार्यशैली की मुखालफत खुद उनके कैबिनेट सहयोगियों ने भी खुलेआम की है। उन पर आरोप लगाया है कि वे बिना अपने साथियों की सहमति से फैसले लेते हैं। कैबिनेट की बैठक में कई ऐसे निर्णय लिए गये हैं। जिससे पार्टी और सरकार की फजीहत हुई है। इसका पूलिंदा समय-समय पर आलाकमान को सौंपा गया है। लेकिन जब भी ऐसा लगा कि रघुवर दास की कुर्सी हिलने ही वाली है। प्रधानमंत्री ने रघुवर दास की पीठ ठोककर अफवाहों पर विराम लगा दिया।

पर अब स्थितियां बदली हैं, लोक सभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। और टारगेट 360 सीटों का है। ये तभी संभव है जब भाजपा शासित राज्यों की सरकारों का परफार्मेंस ठीक हो, वे जनता की अपेक्षाओँ पर खरा उतरे। लेकिन झारखण्ड में पिछले दिनों जो कुछ भी हुआ है। उससे, भाजपा का एक घटक जो रघुवर से नाखुश है उनमें उम्मीद जगी है। मसलन, सीएनटी और धर्मांतरण का मुद्दा और उसके प्रति सरकार का आक्रामक रवैये से विपक्ष और पार्टी के अंदर भी काफी नुरा-कुश्ती हुई है। खासकर आदिवासी नेता और विधायकों का रुख तो कम से कम सरकार के पक्ष में नहीं था। कुछ विधायकों ने तो खुलेआम अपनी बात जनता के सामने रखी और सरकार के फैसले का विरोध किया। मामला बिगड़ता देख अंत में सरकार ने फैसला वापस लिया। सरकार पहली बार घुटने टेकती दिखी। विपक्ष ने भी इस मामले को तूल देकर सरकार की इमेज को आदिवासी विरोधी साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

विपक्ष ने सरकार का जितना छीछालेदर नहीं किया उससे ज्यादा अपनों ने ही सरकार को सांसत में डाला है। मुख्यमंत्री रघुवर दास पर ये आरोप पार्टी के भीतर ही लगते रहे हैं कि वे नेताओं- कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनते, कई बार तो उन्हें सरेआम बेईज्जत भी करते हैं।

मुनासिब है कि जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इन सभी नाखुश नेताओं- कार्यकर्ताओं के बीच होंगे तो ऐसे मुद्दों पर भी बात होगी। पार्टी के भीतर से आ रही कुछ खबरों पर यकीन करें तो ऐसे कई नेता हैं जिनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है वे खुलकर अपनी बात अमित शाह के समक्ष रखेंगे। जितना हो सकेगा मुख्यमंत्री की मुखालफत करेंगे। इसके लिए उन्होंने कई दस्तावेज भी तैयार कर लिये हैं। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए अमित शाह का तीन दिवसीय रांची दौरा कांटों से भरा हो। फिर ये देखना भी दिलचस्प होगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।

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