तुबिद पर निगाहें, राजबाला पर निशाना

चारा घोटाले को लेकर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को जिस तरह घेरने की कोशिश हो रही है। उससे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति भी अछूती नहीं रहेगी। देखा जाय तो मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठने के बाद राजबाला ने जिस प्रकार से राज्य की बागडोर संभाली और उनकी कार्यशैली रही, उससे देखते ही देखते उनके कई विरोधी पैदा हो गए। राज्य की आइएएस लॉबी भी राजबाला वर्मा की बढ़ती हैसियत से खुंदक खाए हुए थी। और लगातार किसी कमजोर कड़ी की तलाश में थी कि किस तरह राजबाला को शिकस्त दी जाए।

हालांकि अंदर खाने यह चर्चा है कि चारा घोटाले से जुड़ा दस्तावेज पिछले कई महीनों से मीडिया की दफ्तरों में घूम रहा है, और कुछ लोगों की निगाह में भी था। लेकिन मीडिया में आने के बाद इस मामले को तुल पकड़ना लाजिमी है।

आइएएस लॉबी के इतर राजनीतिक गलियारे में भी राजबाला के चारा घोटाले में नाम आने से खूब चर्चा हो रही है। जानकारों की मानें तो राजबाला के ऊपर कार्रवाई होने पर चाईबासा में उनके पत्ति जेबी तुबिद की राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। ध्यान रहे कि जेबी तुबिद अभी बीजेपी के प्रवक्ता हैं और 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कैंडिडेट थे, और चुनाव हार गए थे।

जेबी तुबिद आगामी चुनाव को लेकर चाईबासा में लगातार काम कर रहे हैं। अपने पीआर और इमेज बिल्डिंग के लिए वे कई एजेंसियों की सेवाएं भी ले रहे हैं। ऐसे में राजबाला का चाईबासा उपायुक्त रहते हुई वित्तीय गड़बड़ी का मामला जेबी तुबिद के राजनीतिक कैरियर पर असर डाल सकता है। मुख्य सचिव राजबाला वर्मा फरवरी 2018 में रिटायर हो रही हैं, और उनके सेवा विस्तार की चर्चा हो रही थी। पर इस मामले के सामने आते ही इस कयास पर भी प्रश्न चिन्ह लगता नजर आ रहा है।

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