क्या हुआ सरकार ! आग जलाने वाले कौन हैं !

बिहार के कई जिले पिछले कई दिनों से सांप्रदायिक आग की चपेट में हैं. राजनीति अलग हाय तौबा मचा रही है. आरोप प्रत्यारोप की आग भी बढ़ती ही जा रही है, लेकिन इन सबके बीच यक्ष प्रश्न कि निष्कलंक नीतीश राज में आखिर यह हो क्या रहा है! यह आग कैसे लगने दी गई! पुलिस प्रशासन ढीला कैसे पड़ा! सुशासन जिस नीतीश कुमार की पूंजी थी, दंगा रहित बिहार जिस नीतीश कुमार के शासन की पहचान थी, वहां दंगाइयों को इतनी हिम्मत कैसे हुई! क्या यह कोई बड़ा खेल है, चुनाव से पहले की यह हिंसा बिहार के भाईचारे और अमन परस्ती पर दाग है.

कुछ सवाल बिहार के मन में है. लोग जानना चाहते हैं कि भागलपुर में दंगा का आरोपी केंद्रीय मंत्री का बेटा अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया! औरंगाबाद नवादा, मुंगेर सब जगह यह आग फैलती रही और पुलिस तमाशबीन रही, चुपचाप रही. आखिर क्यों! क्या बिहार का प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा है. अगर हां तो किसके!

राज्य सरकार को देर-सवेर यह जवाब तो देना ही पड़ेगा. जो लोग नीतीश कुमार की राजनीतिक शैली को जानते हैं, वह यह भी जानते हैं कि सुशासन के सवाल पर नीतीश कड़ा फैसला लेते हैं. वह किसी की परवाह नहीं करते और अमूमन किसी के दबाव में भी नहीं आते तो फिर क्या हुआ है! असमंजस और बेचैनी दोनों ही दिख रही है. इसलिए तमाम कसमकस से निकलकर राज्य सरकार को कड़े फैसले लेने ही होंगे और दंगाइयों को जेल भेजना ही होगा. बड़े अपराधी और साजिशकर्ता जब जेल जायेंगे, बेनकाब होंगे, तभी बिहार के जख्मों पर मरहम लगेगा.

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