एनडीए के सहयोगी दल आ सकते हैं लालू के साथ !

राजद सुप्रीमो लालू यादव भले ही जेल में बंद हैं लेकिन इसके बावजूद बिहार का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। कहा जा रहा है कि राज्य की सियासी गणित में बड़ा फेरबदल हो सकता है। महागठबंधन से अलग होकर जदयू ने बीजेपी का दामन थाम लिया था इसका कसर अब लालू एनडीए के सहयोगी दलों को तोड़कर लेने वाले हैं। इसकी पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। राजद ने इसके संकेत दिए हैं कि उनके दो सहयोगी दलों को अपने साथ मिलाने जा रही है।

राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने दावा किया है मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लालू प्रसाद की पार्टी के साथ हाथ मिलाने की योजना बना रहे हैं। रघुवंश ने दावा किया कि सारी प्रक्रियाएं अंदरूनी तौर पर चल रही हैं। उन्होंने कहा, 'एक दिन जदयू और बीजेपी का भंडाफोड़ होगा और सभी गैर भाजपाई दल मिलकर इनको पछाड़ेंगे और इन्हें 2018 के अंत तक सत्ता से बेदखल कर देंगे।

गौरतलब है कि 2014 में बीजेपी ने बिहार के छोटे-छोटे दलों को अपने साथ लेकर सियासी रण को फतह किया था। इनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी शामिल थी। बीजेपी के साथ गठबंधन का नतीजा यह रहा कि रालोसपा पार्टी लोकसभा की 3 सीटें जीतने में सफल रही और जब मोदी सरकार बनी तो उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद से नवाजा गया।

बिहार की सियासत फिर करवट लेती हुई नजर आ रही है। नीतीश लालू का साथ छोड़कर दोबारा एनडीए में शामिल होकर सरकार चला रहे हैं। नीतीश और बीजेपी के बीच गहरी होती दोस्ती 2014 में मोदी के साथी बने उपेंद्र कुशवाहा को रास नहीं आ रही है। 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है' की कहावत को चरितार्थ करने की कवायद इस समय बिहार में हो रही है।

जेडीयू के बागी नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद से जेल में मुलाकात की है। चौधरी ने कहा कि राजग में बीजेपी के सभी सहयोगी दल असहज महसूस कर रहे हैं। राजग में बिखराव की स्थिति है। उपेंद्र कुशवाहा अलग होना चाहते हैं। जीतन राम मांझी हमारी पार्टी के नेताओं के संपर्क में हैं।

आरजेडी नेता के इस बयान ने बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि कुशवाहा और मांझी सहित राजग के नेताओं ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रघुवंश का 'अपनी पार्टी में कोई अधिकार नहीं है और आवश्यकता से अधिक बोलने की उन्हें आदत है।

नीतीश कुमार के एनडीए में दोबारा वापसी के बाद से कुशवाहा असहज नजर आ रहे हैं। पिछले काफी समय से कुशवाहा और लालू यादव के बीच नजदीकियां देखने को मिली है। पिछले साल 16 अक्टूबर को लालू यादव और आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बीच पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद हाल ही में लालू के जेल जाने के बाद कुशवाहा ने उनके परिवार से मुलाकात की थी।

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