चुनावी समर में नेता पहुंच रहें हैं बाबा के द्वार, इंदिरा को भी मिला था आर्शीवाद

राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवार जीत का आर्शीवाद लेने के लिए बाबा के पास पहुंच रहे है। उम्मीदवार जीत के लिए जनता के पास तो जा ही रहें है साथ ही साथ बाबा के पास भी जा रहे है ताकि जीत की गारंटी 100 प्रतिशत हो।

कई ऐसे बाबा, तांत्रित, ज्योतिष है जो राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों के जीत के लिए ठेका लेकर जप करा रहे हैं। इसमें राजनेता के साथ साथ उनके शुभचिंतक धन्ना सेठ भी अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। किसी भी तरह से जीत पक्की हो जाए।

उम्मीदवार जनता के बीच चुनाव प्रचार में लगे रहते है ऐसे में बाबा उम्मीदवार से चावल जिसे हम अक्षत कहते है उसे छुआ कर अपने पास मंगवा लेते है साथ ही उसका गोत्र, पिता का नाम, घर का पता भी पूछ लिया जाता है। कर्मकांड में इन सभी चीजों की जरूरत मंत्र जाप, पूजा-पाठ, के दरम्यान होता है।

दिल्ली में कई बाबा, तांत्रिक है जो अपना रोजगार चमका रहे हैं। उम्मीदवारों को दिल्ली में अपने आवास या किसी ऐसी जगह पर बुलाते है जहां किसी को पता न चले। दिल्ली के अलावा यह कारोबार मध्य प्रदेश के उज्जैन में खुब फल फूल रहा है। कहा जाता है कि बाबा महाकाल की नगरी में राज योग व दुश्मनों को परास्त करने वाला दता का बहुचर्चित बगला मुखी मंदिर , सिद्धपुरुषों की भूमि ऋतिकेश, अघोर साधना के लिए जाना जाने वाला कामाख्या मंदिर जैसे स्थानों पर विशेष पुजा किया जा रहा है।

नेताओं से अनुष्ठान, पुजा-पाठ के नाम पर करीब 50 हजार से 70 हजार वसूला जाता है। पूजा-पाठ में संस्कृत विद्यालयों के छात्रों को लाया जाता है। जिन्हें प्रतिदिन सात घंटे जप के लिए 1000 से 1500 रुपये तक मिलते है। कमोबेश यही स्थिति सभी धार्मिक गुरुओं के पास है जो पैसे लेकर राजनेताओं को जीत का दावा करते है।

बाबा से आर्शीवाद लेने के बाद जीत का सबसे चर्चित नाम इंदिरा गांधी का है। इमरजेंसी के बाद 1977 में देश में हुए आम चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के सभी दिग्गज चुनाव हार गए। इस हार से कांग्रेसी खेमे में मायूसी थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाली जनता पार्टी की सरकार बनी। इंदिरा गांधी को जेल तक जाना पड़ा।

हार से मायूस कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आत्ममंथन में जुटीं थीं। कांग्रेस नेता सीपीएन सिंह व कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें देवरिया जिले के मईल में प्रवास कर रहे सिद्ध संत देवरहा बाबा का दर्शन कर आशीर्वाद लेने की सलाह दी। श्रीमती गांधी उनकी सलाह मान तैयार हो गईं और 1978 में वह जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर दूर सरयू तट पर स्थित मईल में योगीराज देवरहा बाबा के दर्शन को आश्रम पहुंचीं।

योगीराज देवरहा बाबा

मुलाकात के दौरान बाबा ने हाथ उठाकर इंदिरा गांधी को आशीर्वाद दिया। बताते हैं कि साथ ही यह भी कहा था कि यही हाथ तुम्हारा भला करेगा। तबसे यह बात प्रचलित है कि बाबा के इस संकेत को इंदिरा गांधी ने गंभीरता से  लिया और लौटने के बाद कांग्रेस के चुनाव चिन्ह गाय-बछड़ा को हटाकर हाथ का पंजा ही चुनाव चिह्न बना लिया जो आजतक जारी है। इसके कुछ दिन बाद हुए लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी फिर से सत्ता में लौट आई।

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