क्या जुलाई में मिट जाएगी BJP-JDU के बीच की खाई!

बिहार में सियासत पूरी तरह गरमाई हुई है, और भविष्य में इसमें कोई कमी होगी इसकी संभावना तो फिलहाल नहीं दिखती। जुलाई का महीना बिहार की सियासत में बड़े बदलाव ला सकता है।

बता दें कि 26 जुलाई को नीतीश के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार के एक साल पूरे हो जाएंगे। 8 जुलाई को जदयू का राष्ट्रीय अधिवेशन दिल्ली में होना है। इस अधिवेशन में यह तय हो जाएगा कि मिशन 2019 के मद्देनजर एनडीए के साथ रहना है या नहीं। 12 जुलाई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सूबे में एनडीए की सरकार बनने के बाद पहली बार आएंगे। जदयू और बीजेपी के बारे में चल रहे विवाद को लेकर रणनीतिक बैठक करेंगे।

इस बैठक के बाद जो फैसला होगा उस पर बहुत हद तक निर्भर करेगा कि जदयू और बीजेपी एक साथ लोकसभा चुनाव में उतरेंगे या नहीं। इसके बाद 20 जुलाई से बिहार विधान सभा के मानसून सत्र की शुरुआत होगी जो 26 जुलाई तक चलेगी। वहीं 26 जुलाई को तेजस्वी यादव पर आईआरसीटीसी मामले को लेकर चार्जशीट दाखिल करने के तय 90 दिन पूरे हो जाएंगे और तब कोर्ट पर निर्भर करेगा कि वो संज्ञान ले या न ले। ऐसे में तेजस्वी यादव का भी भविष्य तय होगा।

उधर, नीतीश कुमार को एक बार फिर महागठबंधन का रुख करने को लेकर उठे कयास पर कांग्रेस पूरी तरह बंटती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे में नीतीश कुमार और कांग्रेस का गठबंधन बन सकता है क्योंकि जिस प्रकार का रवैया राजद की ओर से दिखाया जा रहा है उससे नीतीश कुमार भी फिलहाल राजद से दूरी बनाना ही उचित समझेंगे।

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