झारखंड विधानसभा: कहीं चुंबन का राग, कहीं भूमि विवाद

झारखंड विधानसभा का छोटा सत्र पक्ष और विपक्ष की हठधर्मिता की वजह से और छोटा हो गया। सत्ता पक्ष जहां झामुमो विधायक पर चुंबन राग गाता दिखा, वहीं विपक्ष भूमि अधिग्रहण जैसे मसले में उलझा रहा। इस तरह दूसरा दिन भी आरोप प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गया।

चतुर्थ विधानसभा का शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही 1:00 बजे के बाद 14 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस मामले पर भू राजस्व, निबंधन, पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री अमर कुमार बाउरी ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सदन के अंदर विपक्ष का व्यवहार अशोभनीय है। इस बार का सत्र काफी छोटा है और कई गंभीर विषयों पर सदन में चर्चा होना है।

लेकिन विपक्ष कार्य को बाधित कर सत्र की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष के इस रवैये का अंदाजा पहले से था। पूर्व में भी विपक्षी दलों ने कई गंभीर विषयों पर चर्चा ना करके सत्र को बाधित करने का काम किया है। शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधानसभा में आयोजित कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने विपक्ष के विधायकों से और सदस्यों से आग्रह किया था कि सरकार उनके सभी सवालों का जवाब गंभीरता से देगी लेकिन विपक्ष सदन की गरिमा को बनाए रखें। सरकार देर रात तक भी सदन को चलाने में पीछे नहीं हटेगी। मंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा कि विपक्ष ने जिन विषयों पर आज कार्यस्थगन का प्रस्ताव लाया उन विषयों पर जब पूर्व में सदन में बहस चल रहा था तो विपक्ष ने सदन का बहिष्कार किया था और आज उन्हीं विषयों पर विपक्ष चर्चा करना चाहती है।

विपक्ष जनता और खुद को छलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और जनता के मुद्दों पर चर्चा करने का सदन से बड़ा और बेहतर मंच कोई भी नहीं है। उन्होंने विधानसभा स्थापना दिवस का उदाहरण देते हुए कहा कि विधानसभा स्थापना दिवस में भी विपक्ष के किसी भी विधायक ने समारोह में भाग नहीं लिया था। जिससे लगता है कि विपक्ष को विधानसभा की गरिमा पर भरोसा नहीं है। उन्होंने विपक्ष के इस तरह के रवैये पर दुख व्यक्त किया।

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