दलितों के अधिकार पर बात के बजाय हम राम मंदिर में बिजी हैं : उदय नारायण चौधरी

जनता दल यूनाइटेड के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। एक तरफ जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शरद यादव ने पहले से ही पार्टी के खिलाफ बागी तेवर अपना रखा है। वहीं अब बिहार में भी पार्टी और सरकार के खिलाफ बयानबाजी शुरू हो गई है। बिहार जेडीयू के नेता व बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने गुरुवार को राज्य और केंद्र सरकार पर तंज करते हुए कहा कि इस समय निचली जातियों के अधिकार के मुद्दे पर बात होनी चाहिए लेकिन हम गौरक्षा और राम मंदिर में व्यस्त हैं।

 

उदय ने कहा कि प्रमोशन में रिजर्वेशन खत्म करना दलित, आदिवासी और निचली जातियों के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने आगे कहा कि हमें जब दलित-निचली जातियों और कुपोषण के मुद्दे उठाने चाहिए ऐसे में हम गौरक्षा और राम मंदिर में बिजी हैं। बता दें कि जेडीयू के दो नेता उदय नारायण चौधरी और श्याम रजक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर किया था और इशारों ही इशारों में पार्टी को दलित विरोधी बताया था। सोमवार को वंचित वर्ग मोर्चा की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रमोशन में रिजर्वेशन को खत्म किए जाने और क्रीमी लेयर को शामिल किए जाने के प्रस्ताव की निंदा की थी।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के पास इसको लेकर राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव होने का आरोप लगाया था। हालांकि बाद में श्याम रजक ने स्पष्ट किया था कि वह इसको लेकर बिहार की नीतीश सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन उनके बयान पर पार्टी के नेताओं ने प्रहार करना शुरू कर दिया था। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि जब कोई व्यक्ति किसी पद पर नहीं होता है, तब वह चिंता जताना शुरू कर देता है। वशिष्ठ की बातों से सहमति जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने चौधरी और रजक पर दलितों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि जब वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीब थे तब उन्होंने दलितों को लेकर कुछ भी नहीं किया।

इस कड़ी में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने जेडीयू के दोनों के दोनों नेताओं का समर्थन करते हुए नीतीश सरकार को आरक्षण विरोधी बताया। आरजेडी सुप्रीमो ने कहा था, 'उदय नारायण चौधरी और श्याम रजक जो कुछ (दलितों के आरक्षण को लेकर) कह रहे हैं, वह सही है। दलितों को मिले आरक्षण पर कई ओर से हमला हो रहा है। मुझे आश्चर्य है कि उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार इस मुद्दे पर चुप हैं। हम जानते हैं कि वह हमेशा आरक्षण विरोधी रहे हैं।'

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