रामगढ़ में हुई भूख से मौत, प्रशासन लीपापोती में जुटा!

सरकारी दावों के बावजूद झारखंड में भूख से हो रही मौत रूकने का नाम नहीं ले रही है। सरकार के मंत्री और अधिकारी यह मानने के लिए तैयार ही नहीं ही किसी व्यक्ति की मौत भूख से हुई है। पूरा सरकारी अमला यह साबित करने पर तुला है कि मौत की मुख्य वजह बीमारी है भूख नहीं। उधर, सावित्री की मौत के एक हफ्ते के अंदर ही रामगढ़ के मांडू में भूख से 40 साल के चिंतामन मल्हार की मौत की खबर मिली है।
चितामण मल्हार के बेटे विदेश के मुताबिक उसके पिता ने कुछ दिनों से खाना नहीं खाया था। जानकारी के अनुसार विदेश ने पत्रकारों को अपनी झोपड़ी भी दिखाई जिसमें खाने के लिए कुछ भी नहीं था। चितामण की मौत के बाद जैसे ही ग्रामीणों ने इसकी सूचना बीडीओ को दी, पूरा प्रशासन मौके पर पहुंच गया और हर बार की तरह पूरा सरकारी तंत्र खानापूर्ति करने में जुट गया। बताया जाता है कि प्रशासन ने मृतक के बेटे पर दबाव बनाया जिसके बाद उसने अपना बयान बदल दिया।

बताया जा रहा है कि सीओ ललन कुमार और सीआई संजीव भारती ने पीड़ित परिवार को पारिवारिक लाभ के तहत दाह संस्कार के लिए पांच हजार रुपये और अनाज मुहैया कराया। वहीं, 15 हजार रुपये दाह संस्कार के लिए देने का आश्वासन दिया।
बहरहाल, कहा जा रहा है कि प्रशासन को जैसे ही इसकी सूचना मिली, सारे अधिकारी वहां पहुंचे और मृतक के बेटे ने बयान बदलते हुए कहा कि उसके पिता ने रात में खाना खाया था। मांडू के बीडीओ मनोज कुमार गुप्ता ने शुरुआती जांच के बाद भूख से मौत से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि चितामण की मौत लू लगने से हुई है।

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