हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी, ये राज्य सरकार क्या चीज़ है

-टाना भगत विकास प्राधिकार का अध्यक्ष टाना भगत ही बने : गंगा टाना भगत
-टाना भगतों का अनादर कर रही है राज्य सरकार

टाना भगत सरकार द्वारा बनाये गये टाना भगत विकास प्राधिकार में किये गये प्रावधान से नाखुश हैं। उन्होंने सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें कहा गया है कि इस प्राधिकार का अध्यक्ष राज्य का मुख्य सचिव होगा। इसी प्रकार जिले में उपायुक्त इसके अध्यक्ष होंगे, वहीं प्रखंड स्तर पर बीडीओ या सीओ इसके अध्यक्ष होंगे।

मांडर के पूर्व विधायक गंगा टाना भगत ने बताया कि सरकार के इस फैसले से राज्य के सभी टाना भगत अपमानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार रियाडा, खादी ग्रामोद्योग जैसे प्राधिकार या बोर्ड में किसी सामाजिक या राजनीतिक व्यक्ति को अध्यक्ष बना सकती है तो टाना भगत विकास प्राधिकार में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार एक- एक टाना भगत की कमेटी राज्य से लेकर जिला और प्रखंड स्तर तक गठित करे और टाना भगतों को ही इस प्राधिकार का अध्यक्ष बनाये और जिस प्रकार अन्य प्राधिकार में अधिकारी अध्यक्ष के सचिव के तौर पर कार्य करते हैं। उसी प्रकार की संरचना बनाये जिससे टाना भगतों का सम्मान बना रहे।

श्री भगत ने कहा कि सरकार जानबूझ कर टाना भगतों को फिर से आन्दोलन करने को मजबूर कर रही है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जब हमारे पूर्वज अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते हैं तो ये सरकार क्या है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन में बनाये गये गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 की तरह ही ये सरकार भी व्यवहार कर रही है। आज फिर से उपनिवेशवाद की याद ताजा हो जाती है। जब उनसे सबकुछ छीन लिया गया था।

उन्होंने कहा कि जो टाना भगत इस प्राधिकार के लिए पात्रता रखते हैं, ये उनका हक है कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ यह दायित्व दिया जाये ताकि वे वर्षों से संघर्ष कर रहे अपने समाज के हित में उचित निर्णय ले सकें। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि सरकार ने टाना भगतों को इस लायक भी नहीं समझा कि वे ऐसी किसी जिम्मेवारी का निर्वहन कर सकें।

श्री भगत ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर 30 अगस्त को टाना भगत मुक्ति दिवस समारोह के अवसर पर पूरे राज्य के टाना भगत सरकार के फैसले का पूरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई लड़ी तो हमने देश के लिए कुर्बानी दी है। इस लड़ाई को भी लड़ेंगे। एक ओर सरकार उन्हें जमीन वापस दिलवाने का वादा करती है वहीं दूसरी ओर उनके सम्मान के साथ खिलवाड़ करती है। सरकार का ये दोहरा चरित्र है, यह किसी भी स्थिति में बरदाश्त नहीं किया जायेगा।
साभार
ganadesh.com

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