पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है सरकार : विनोद पांडेय

सरकार की नीतियों के खिलाफ झामुमो सड़क पर उतरेगी, 14 नवंबर को पार्टी की ओर से महा धरना का आयोजन किया गया है। सरकार द्वारा पारित अधिसूचित भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 में संशोधन को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि सरकार कॉरपोरेट घरानों को किसानों की जमीन औने-पौने कीमत पर जबरदस्ती देना चाहती है।

विधानसभा में झामुमो नेता हेमंत सोरेन और पूरी पार्टी ने पुरजोर विरोध किया था। किसानों को होने वाले घाटे को लेकर सरकार को आगाह किया था। लेकिन सरकार ने पूंजी पतियों के दबाव में विधेयक पारित कर दिया। श्री पांडेय ने कहा कि झामुमो सरकार के मंसूबे को किसी भी हाल में पूरा नहीं होने देगी। सदन से लेकर सड़क तक गरीबों के हित में आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है, राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने आ रहे हैं। उम्मीद है कि वे राज्य की जनता की भावना समझेंगे, और इस विधेयक को मंजूरी नहीं देंगे। यह विधेयक आदिवासी, मूल वासी, दलित, अल्पसंख्यक और किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि राज्य पहले से ही विस्थापन का दंश झेल रहा है। राज्य में पहले से ही कई कंपनियों के स्थापित होने के बाद हजारों की संख्या में आदिवासी, मूलवासी विस्थापित हुए हैं, अभी तक उनके पुनर्वास या मुआवजे का समुचित उपाय नहीं हुआ है।

लेकिन राज्य के विस्थापितों की चिंता करने के बजाय सरकार गरीबों की जमीन छीनकर पूंजीपतियों को देना चाहती है, उन्हें बेघर करना चाहती है। पर सरकार के इस आदिवासी विरोधी, गरीब विरोधी नीति का झामुमो में पूरी ताकत से विरोध करेगी। सरकार लाठी और बंदूक की बदौलत किसी का भी जमीन नहीं छीन सकती है।

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