झारखंड की नौकरशाही…पॉलिटिशियन फेल

-कोई राज्यसभा की तैयारी में, कोई विपक्ष की यारी में

झारखंड की नौकरशाही जिस तरह का सियासी करतब दिखा रही है, उसे देखकर तो सधे हुए राजनेता भी चकरा जाएं! कई गुटों में बंटी झारखंड की नौकरशाही बड़े-बड़े खेल खेल रही है। मुख्य सचिव स्तर की एक अधिकारी जहाँ राज्य सभा सीट के लिए दिल्ली में अपनी गोटियाँ फिट कर रही है तो पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा के एक स्वजातीय अगला मुख्य सचिव बनने के लिए बड़े सरकार का हर गलत आदेश पूरा करने को बड़ा तत्पर दिखते हैं, ऐसे ही एक चक्कर में उन्हें हाल ही में उच्च न्यायालय की फटकार भी सुननी पड़ी। उन्होंने अपनी स्वामीभक्ति दिखाने के अति उत्साह में राज्य सांख्यिकी अधिकारी को बर्खास्त कर दिया। हाई कोर्ट ने आदेश भी बदला और फटकारा भी।

मुख्य सचिव फरवरी में रिटायर होंगी, शाह दरबार से आशीष प्राप्त कर जिस तरह इस कुर्सी पर आसीन हुई थी, उसी तरह सियासी एंट्री की तैयारी है। लेकिन बुरा हो राज्य के कुछ जलनेवाले अफसरों का, जिन्होंने आरएसएस के जरिये इनकी अकूत कमाई और इनके लालू प्रेम के किस्से दिल्ली के कई अन्य दरबारों में पहुंचा दिए। इनके उपर एक व्यवसायी के आरोपों पर मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल पूछा है। सरयू राय ने मुख्यमंत्री को फ़ोन पर सीधे बताया भी कि या तो मुख्य सचिव आरोपों का खंडन करें या वो इस मसले को पब्लिक डोमेन में ले जायेंगे। अमित शाह लौटने के बाद संभव है इस मसले पर सरयू राय कोई बड़ा बम फोड़ें।

ऐसा ही है मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के साथ भी। सीएमओ में ही एक लॉबी लगातार प्रचारित कर रही है कि संजय कुमार बस जाने ही वाले हैं। इनपर आरोप लगाया जा रहा है कि इन्होने सुचना एवं जनसंपर्क विभाग का एक काम शिबू सोरेन के पीए की कम्पनी को दिया। ऐसे कई आरोप हैं, जिनका पुलिंदा इनके विरोधी कई जगह पहुंचा रहे हैं।

मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव का गुट अभी भारी है, वहीं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और भावी मुख्य सचिव अमित खरे का गुट एक साथ है। सभी अपनी बाज़ी खेल रहे हैं, एक- दुसरे पर पलटवार कर रहे हैं, मुख्यमंत्री संतुलन साधने की बाजीगरी में मस्त हैं और आम लोग त्रस्त हैं।

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