बजट बिहार को छलने वाला: तेजस्वी

केंद्रीय बजट में बिहार के लिए कुछ भी नहीं है। बिहार को विशेष पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे पर कुछ भी नहीं मिला। नीतीश कुमार बताए क्या यही उनके लिए डबल इंजन है? नीतीश जी की वजह से बीजेपी की केंद्र सरकार बिहार के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

मोदी सरकार ने धरातल पर कुछ नहीं किया और ना ही कर रही। सरकार सिर्फ़ कागज़ों पर बातों के पकौड़े और जुमलों के बताशे उतार रही है। भाजपा के चरित्र के अनुरूप Super Rich के हितों को ध्यान में रखा गया।

- बजट किसानों के साथ छलावा है। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1600रू प्रति क्विंटल है लेकिन बाज़ार मे उस मूल्य पर कोई गेहूँ ख़रीदने वाला नहीं है। मजबूरन किसान को 1300 मे गेहूँ बेचना पड़ता है। किसका डेढ़ गुणा MSP देने की बात है? दिल्ली के वातानुकूलित कैबिनों में बैठकर किसानों का भाग्य मत लिखिए।

- किसानों की खेती की चिंता छोड़ मोदी सरकार वोटों की खेती में लीन है। बीजेपी देश से किसानों को समाप्त करना चाहती है। पूंजीपतियों का NPA 10 लाख करोड़ है लेकिन पूंजीपतियों की रखवाली मोदी सरकार 80 करोड़ किसानों का कुछ हज़ार करोड़ रुपए क़र्ज़ माफ़ नहीं कर सकती। किसानों की इतनी ही चिंता है तो क्यों नहीं उनका क़र्ज़ माफ़ कर देते आय तो उससे भी बढ़ जायेगी।

- कृषकों की आय को 2022 तक तक दुगना कर दिया जाएगा, हवा हवाई चुनावी दावा है पर कोई रोड मैप नहीं, अगर हम सचमुच उस ओर बढ़ रहे होते तो तो पिछले तीन साल में ही किसानों के आत्महत्या में लगातार गिरावट आ रही होती और आज रुक चुकी होती।

- युवाओं के लिए यह काला बजट है। देश की सबसे बड़ी आबादी युवाओं को मोदी सरकार द्वारा लगातार ठगा जा रहा है। बजट में कहते है 75 लाख नौकरी पैदा करेंगे। साहब, पहले यह तो बताओ विगत चार साल में कितनी नौकरियां पैदा की? अब एक साल में कौन सी जादुई छड़ी है जो 75 लाख नौकरी पैदा करेंगे। अगर इतना ही आत्मविश्वास है तो बतायें कैसे करेंगे और विगत चार साल में क्यों नहीं की? केंद्र सरकार सरकारी नौकरियों पर श्वेत पत्र लेकर आएं। यह नहीं बताया अब तक की रिक्तियां क्यों नहीं भरी गई?

- असंगठित क्षेत्र को पिछले दो साल में अनाप शनाप नीतियों द्वारा सबसे ज्यादा चोट पहुंचाया गया। असंगठित क्षेत्र को उबारने और असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों के कल्याण के प्रति बजट में सरकार साफ तौर पर उदासीन दिखी। Job Creation पर भी बजट विल्कपहीन है।

- मध्यम वर्ग के लिए कोई राहत नहीं, टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, शिक्षा स्वास्थ्य पर सेस बढ़ा कर मध्यम वर्ग को झटका दिया है, कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गयी।

- प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति बजट में कोई समर्पण नहीं दिखा।

- शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। सरकार गुणवतापूर्ण शिक्षा को समाप्त करने पर तुली हुई है।

- स्मार्ट सिटी की बात करते है लेकिन चार साल में कहीं भी काम शुरू नहीं हुआ। एक भी स्मार्ट सिटी नहीं बनी। गांवों को क्यों भूल गए? गांव क्या देश का हिस्सा नहीं है?

- सरकार बताए विगत चार साल में कितने ग़रीबों को कितने मकान दिए गए। पूंजीपतियों की सरकार द्वारा लगातार ग़रीबों को छला जा रहा है।

- कोर सेक्टर जैसे रक्षा और रेलवे की अनदेखी हुई। रेलवे पर बोलने के लिए सुरक्षा के अलावा कुछ नहीं था, wifi, escalator आदि add on हो सकते हैं, पर मुख्य script नहीं, जाहिर है जिस रेलवे का अलग बजट होता था, उसे 10 वाक्यों में निपटा दिया गया।  

- वित्त मंत्री ने सैन्य बलों को उनके बलिदानी के लिए तो धन्यवाद कहा, दो defence industrial corridor की बात कही है पर Budget allocation figure पर एक शब्द नहीं कहा।

- सरकार को मैंडेट 2019 तक मिला था। अब कह रहे है कि हम 2022 तक करेंगे। आप तो बड़ा छाती पीटकर कहते थे हम 60 महीने नहीं 60 दिन में देश बदल देंगे। 70 साल की कसर 60 दिन में निकाल देंगे। 100 दिन में काला धन लाएंगें। पहले उन वायदों पर तो बोल देते। क्या हुआ तेरा वादा...

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