बजट के बहाने मिशन 2019 पर नजर

ये भले ही कहा गया हो कि मोदी सरकार का आखिरी बजट किसी भी हाल में आम चुनावों की बरक्स तैयार नहीं किया जाएगा। लेकिन इसकी बातें तो हर जगह हो रही हैं कि फिर 10 करोड़ परिवारों के लिए बीमा का प्लान क्यों लाया गया। केंद्र सरकार का बजट स्वास्थ्य, आवास, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, शिक्षा, बुनियादी सुविधाओं पर फोकस कर बनाया गया है। देखा जाय तो ये बजट मुख्यत: ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित आदर्श बजट है। किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने की शुरुआत न्यूनतम समर्थन मूल्य व कृषि उपज बढ़ाने और ई-नाम के जरिए कृषि उपज विक्रय प्रक्रिया का लगातार डिजिटलाइजेशन करने से हो चुकी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि निर्यात क्षमता 30 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर ले जाने के लक्ष्य के साथ ध्यान आकर्षित किया है।

नेशनल हेल्थ पॉलिसी 2017 को ‘यूनिवर्सल हेल्थ केयर सिस्टम’ बनाने की दिशा में पहला कदम माना जा सकता है। ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम और ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना’ मील का पत्थर साबित होने वाली पहल है। बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 9.4 लाख करोड़ रुपये का आवंटन दर्शाता है कि इनका भी ध्यान रखा गया है। कॉरपोरेट देनदारियों के लिए स्टांप ड्यूटी की पुनर्समीक्षा और वैकल्पिक निवेश फंड के रूप में उद्योगों के लिए व्यापार पूंजी कोष की स्थापना कई तरह के परिणाम देगी।

बजट में वित्तीय घाटा 3.3 फीसदी का दिखाया गया है। यह वित्तीय दायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम) के तहत घाटा कम करने के निर्धारित लक्ष्य से जरा सा भटकाव है। जीडीपी की तुलना में केंद्र सरकार पर ऋण करीब 40 प्रतिशत है, जो आसियान देशों के अनुरूप ही है। इसे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) 38 प्रतिशत मानता है। विकसित होते और उभरते एशिया के लिहाज से यह 50 प्रतिशत माना गया है। आईएमएफ ने निर्माण क्षेत्र और सेवा क्षेत्र के सहयोग से जीडीपी की वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, भारत सरकार ने भी इसे वित्त वर्ष 2018 की दूसरे भाग के लिए 7.2 से 7.5 प्रतिशत पर रखा है।

टैक्स का कुल दायरा 6.4 करोड़ नागरिकों से बढ़कर 8.0 करोड़ हो चुका है। इसी के अनुरूप टैक्स से बचने के लिए रास्ते रोकने का भी प्रयास किया गया है। लोग उम्मीद कर रहे थे कि शायद करों में कुछ कमी आएगी, लेकिन इन अपेक्षाओं के परिणाम मिले-जुले हैं। कंपनियों को 25 प्रतिशत टैक्स के लिए कुल टर्नओवर सीमा को 250 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है तो व्यक्तिगत करदाताओं को सिवाए कुछ कटौतियों के ज्यादा छूट दिखाई नहीं दे रही हैं।

वित्त मंत्री ने निवेश के होल्डिंग पीरियड में बदलाव किए हैं ताकि ऋण आधारित म्यूचल फंड्स लंबे समय तक कैपिटल गेन का फायदा उठा सकें। हालांकि मार्केट में एक तबका उम्मीद करता था कि इस तरह के बदलाव इक्विटी को लेकर भी होंगे। कैपिटल गेन टैक्स पर बना हुआ रहस्य भी आज अंतत: खत्म हुआ है। कुछ इक्विटी निवेशक महसूस कर सकते हैं कि बदलाव बहुत कम हैं, लेकिन अगर आप इस नजरिए से देखें कि इन बदलावों को आर्थिक वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लाया गया है, तब आपकी सोच बदल जाएगी। खर्च और अन्य क्षेत्रों का विश्लेषण अभी होना बाकी है, लेकिन मेरा मानना है कि यह गिलास को ‘आधा भरा आधा खाली’ देखने जैसा है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *