मिशनरीज के मामले में पॉलिटिकल एजेंडा सेट कर रही BJP: सुबोधकांत सहाय

बच्चों का सौदा किए जाने के मामले को लेकर सूबे की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। जहां एक ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगा रहा है वहीं दूसरी ओर बीजेपी और कई अन्य संगठनों का आरोप है कि मिशनरीज संस्थाएं विदेश से करोड़ों का फंड लेती हैं और गलत कामों में संलिप्त हैं।
अब इस मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने राज्य सरकार के साथ ही केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर भी निशाना साधा है। देश भर की मिशनरी संस्थानों की जांच कराने को लेकर उन्होंने केंद्रीय मंत्री पर हमला किया है और कहा है कि डायन भी सात घर छोड़ देती है।
निर्मल ह्रदय से बच्चों को बेचे जाने के मामले को लेकर विपक्ष लगाता है सरकार द्वारा मिशनरी ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित राज्य के सभी संस्थानों की जांच के खिलाफ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने मिशनरी ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित निर्मल ह्रदय का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बच्चे बेचने के मामले से बीजेपी सरकार के पॉलिटिकल एजेंडे को बल मिल गया है कि कैसे इन को बदनाम किया जाए। उन्होंने कहा कि हमें जान के शॉकिंग लगा है कि मेनका गांधी जैसी महिला जिनका संघ का बैकग्राउंड नहीं था। वह महिला देश भर में ऐसे संस्था के ऊपर इंक्वायरी करवा रही हैं। इसकी जितनी भर्त्सना की जाए कम है।
सहाय ने कहा कि कभी मेनका गांधी सरकारी संस्था और मिशनरी संस्था में जाकर देखें की दोनों की व्यवस्था में कितना अंतर है। उन्होंने कहा कि डायन भी साथ घर छोड़ कर ही कुछ करती है। उन्होंने कहा कि इन संस्था में ऐसे माताओं की रक्षा की जा रही है। जो डिप्रेशन में जान न दे दे। एक कर्मचारी की वजह से पूरे देश की संस्था की जांच कराना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मेनका यहां तक बोल गई कि मदर टेरेसा से भी सम्मान वापस ले लिया जाए।
उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जिस अग्रवाल फैमिली ने बच्चा खरीदा और जो सदर अस्पताल में मिडिल मैन की भूमिका निभाई उस पर एफआईआर होना चाहिए । साथ ही जो कर्मचारी गुनहगार है उसे बेशक जेल हो। लेकिन जो बेगुनाह सिस्टर को जेल भेजा गया यह राजनीतिक एजेंडा है।

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