सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर BJP

-कांग्रेस अब राज्यसभा में भी कमजोर

वेंकैया नायडू भारत के अगले उप-राष्ट्रपति होंगे। शनिवार (5 अगस्त) को हुए मतदान को उन्होंने जीत लिया है। वेंकैया नायडू को कुल 516 वोट मिले। वहीं गोपाल कृष्ण गांधी को 244 वोट मिले। उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए कैंडिडेट एम वेंकैया नायडू की जीत भले ही पहले से तय थी, लेकिन नतीजे आने के बाद भारतीय राजनीति के समीकरणों में बड़ा बदलाव हुआ है। विपक्ष के कैंडिडेट गोपाल कृष्ण गांधी की हार के साथ ही देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की पकड़ से केंद्रीय सत्ता पूरी तरह छूट चुकी है। देश पर एक दशक तक यूपीए के शासन के दौरान कांग्रेस को हासिल सियासी ताकत अब ढलान की ओर है। वहीं, इस जीत के साथ बीजेपी ने कामयाबी के नए कीर्तिमान गढ़े हैं। कोई शक नहीं कि आने वाले वक्त में पार्टी की देश की सत्ता पर पकड़ और मजबूत होने वाली है।

नायडू के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद पहली बार देश में टॉप चार पदों पर बीजेपी के नेता काबिज होंगे। पहली बार देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर एक ही दल से हैं। हालांकि, नायडू के उपराष्ट्रपति बनने से संख्याबल पर भले कोई असर न हो, लेकिन इससे पार्टी न सिर्फ राज्यसभा में और मजबूत होगी, बल्कि बीजेपी नेताओं का हौसला और रुतबा काफी बढ़ जाएगा।

उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी असर पड़ेगा। पार्टी यह मान रही है कि जिस तरह से यूपी और उत्तराखंड के नतीजों ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी की राह आसान की, वैसे ही उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद अब हिमाचल प्रदेश, गुजरात और फिर कर्नाटक में भी बीजेपी को बहुमत मिलने में कोई अड़चन नहीं आएगी। अगर इन विधानसभाओं के नतीजे बीजेपी के मनमुताबिक रहे तो इसका सीधा संकेत जाएगा कि मोदी-शाह के नेतृत्व में पार्टी अजेय है। इससे 2019 के चुनाव के नतीजे भी चुनाव से पहले तय होते नजर आएंगे।

वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि इससे पहले जब भी संयुक्त सरकारें बनी हैं, तब कुछ पद सहयोगी दलों को दिए जाते रहे हैं। हालांकि, इस बार मोदी-शाह की जोड़ी ने जानबूझकर सभी पद बीजेपी नेताओं को देकर पार्टी का मनोबल और उंचा करने और विपक्ष का हौसला तोड़ने का काम किया है।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, अब दोनों पदों पर बीजेपी की ओर से नामांकित नेता हैं। इन पदों पर 10 सालों तक कांग्रेस की ओर से नॉमिनेट नेता आसीन रहे हैं। वहीं, पीएम समेत अब देश के तीन शीर्ष पदों पर कांग्रेस का कोई नेता नहीं है। उपराष्ट्रपति चुनाव में हार के साथ ही अब आखिरी मजबूत गढ़ में भी कांग्रेस की हालत पतली हो गई है। दरअसल, अभी तक विपक्ष अपने संख्याबल की वजह से केंद्र सरकार को उच्च सदन में मजबूत चुनौती देता रहा था। कभी यहां कई अहम बिलों को पास कराने के मामले में सरकार को नाकों चने चबाने पड़े थे।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि नायडू के राज्यसभा के सभापति बनने से भले ही संख्याबल सरकार के पक्ष में न हो, लेकिन इसके बावजूद वहां के हालात को तो नियंत्रित किया ही जा सकता है। इसकी वजह यह है कि नायडू काफी अनुभवी हैं, जिससे उन्हें विपक्ष को साधने में ही मदद नहीं मिलेगी।
मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। वह लगातार दो बार इस पद पर रह चुके हैं। नायडू 10 अगस्त को हामिद अंसारी का स्थान लेंगे।

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