नोटबंदी बना सियासी हथियार

-नोटबंदी के साल भर बाद

कांग्रेस, झाविमो, झामुमो, राजद सहित पूरा विपक्ष 8 नवंबर को नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने पर काला दिवस मनाएगी। लोगों को याद दिलाएगी की नोटबंदी के क्या-क्या दुस्परिणाम हुए। जनता को हुई परेशानियों का हवाला देकर सरकार पर हमला बोला जाएगा। यह कोशिश की जाएगी की केंद्र सरकार के इस फैसले से उनकी नाकामी को जनता के समक्ष रखा जाय ताकि जनता ये किसी भी कीमत पर भूल नहीं पाए। पीएम मोदी सरकार को नोटबंदी को लेकर देश ही नहीं पूरी दुनिया में कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी है।

अर्थशास्त्रियों से लेकर उद्योगपतियों तक ने नोटबंदी को ऐतिहासिक भूल बताया और यहां तक दावा किया गया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था बेपटरी हो गई। जीडीपी में भारी गिरावट आयी। हजारों नौकरियां चली गईं। रियल एस्टेट से लेकर खुदरा व्यापार पूरी तरह धाराशायी हो गया।

झारखंड की राजधानी रांची में कपड़ा व्यवसायी अमित गुप्ता बताते हैं कि नोटबंदी के असर से वे अभी भी उबर नहीं पाये हैं। नोट बंदी के कारण उनके दुकान की सेल भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। वहीं रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले अजय सिंह का कहना है कि नोटबंदी ने इस सेक्टर की कमर तोड़ दी है। सरकार की नीति से इस कारोबार को उबरने में अब काफी वक्त लगेगा।

वहीं दूसरी ओर भाजपा की दलील है कि नोटबंदी से काले धन का कारोबार पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। इससे वैसे सभी कारोबारियों को परेशानी हो रही है जो किसी न किसी रूप में अवैध रूप से धंधा करने में लिप्त थे। कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग गयी है। पत्थरबाजी की घटनाएं अब बिलकुल न के बराबर हो रही हैं। देश में काले धन पर चोट हुई है। बेनामी संपत्ति पर लगाम लगाया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष खासकर कांग्रेस को इससे सबसे ज्यादा घाटा हुआ है क्योंकि वह शुरू से ही भ्रष्टाचार में लिप्त रही है।

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