पिछड़ों की मांग पर सूबे में गरमाई सियासत

राज्य में जातीय आधार पर अपने हक की मांग को लेकर कई सामाजिक संगठन धीरे- धीरे सक्रिय हो रहे हैं। एक ओर जहां राज्य में पिछड़ों द्वारा आरक्षण देने का मांग तुल पकड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कई ऐसे भी सामाजिक संगठन हैं जो अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरने की बात कह रहे हैं।

इसी कड़ी में तेली समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष धर्मदयाल साहू का कहना है कि तेली समाज को भी अनुसूचित जाति में शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नाई महासभा की भी लम्बे समय से मांग है कि नाई जाति को राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति में शामिल किया जाये। ऐसे में अंतिम निर्णय सरकार को लेना होगा। वहीं दूसरी तरफ कुड़मी समाज के लोगों का 29 अप्रैल को कुड़मी महाजुटान को लेकर रांची जिले में प्रचार अभियान शुरू हो गया है।

महाजुटान के प्रवक्ता डॉ राजा राम महतो के नेतृत्व में रांची जिले के सोनाहातू , बुण्डू, राहे, सिल्ली में कुड़मी महाजुटान को सफल बनाने के लिये दौरा किया जा रहा है। लोगों से जनसंपर्क अभियान कर नुक्कड़ सभा का अयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में राजा राम महतो ने कहा कि 29 अप्रैल 2018 को होने वाले महाजुटान में लाखों की संख्या में कुड़मी समाज के लोग मोरहाबादी मैदान में जुटेंगे। कुड़मी समाज ने अपने हक व स्वाभिमान के लिये एकजुट होने का निर्णय लिया है। हम आदिवासी हैं इसके पर्याप्त दस्तावेज हमारे पास हैं। हमें नकारा नहीं जा सकता है।

हमारी भाषा और सांस्कृति झारखण्ड की पहचान है। मीडिया प्रभारी भुनेश्वर महतो ने कहा कि झारखण्ड राज्य का निर्माण ही कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति मानकर किया गया है। लेकिन झारखण्ड अलग राज्य के बाद सबसे ज्यादा कुड़मी जाति को ही छला गया है। अगर कुड़मी जाति को अनूसुचित जाति में शामिल किया जाता है तो राज्य अपने आप पांचवी अनुसूची में शामिल हो जायेगा ओर पूरे राज्य में पेशा कानून पूर्ण रूप से लागू हो जायेगा।

बहरहाल, अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों के देखते हुए सरकार इन संगठनों के मांगों पर गौर करती है या इनकी लड़ाई यूं ही जारी रहेगी।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *