अशोक चौधरी अब जेडीयू की दहलीज़ पर !

मकर संक्रांति तो खत्म होने को है, इसी की वज़ह से बिहार के कई राजनेताओं ने अपना दल बदल अभियान रोक रखा था. अब ऐसे नेताओं के पलायन का सियासी मुहूर्त तय होने वाला है. इस कड़ी में सबसे ताजा नाम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी का है. राजनीतिक गलियारे से जो खबर छन कर आ रही है, उसके अनुसार अशोक का जदयू में जाना फाइनल है. नीतीश ने भी अपनी ओर से हरी झंडी दे दी है. अपने साथ 4 में से तीन विधान पार्षदों को तोड़ने का दावा कर रहे चौधरी अगर ऐसा करने में कामयाब हो जाते हैं तो उनपर दल बदल की तलवार भी नहीं लटकेगी.

हालांकि मदनमोहन झा समेत एक अन्य पार्षद ने अशोक चौधरी को मौकापरस्त नेता कहा है, ऐसे में अशोक चौधरी फूंक–फूंक कर कदम उठा रहे हैं. पहले इन्हें वाया बीजेपी जाना था, चौधरी को सासाराम सीट से लडाने की बात हुई थी लेकिन बाद में उदय नारायण चौधरी और श्याम रजक के रवैये को देखते हुए नीतीश ने इन्हें पार्टी के दलित चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करने का मन बना लिया.

अशोक चौधरी नीतीश कुमार से अपने व्यक्तिगत रिश्ते की वज़ह से आश्वस्त तो हैं लेकिन जेडीयू में जाने से पहले वो आरसीपी सिंह और ललन सिंह से अपने रिश्ते को सुधार लेना चाहते हैं. चौधरी के निकट के सूत्रों के अनुसार अशोक अभी पार्टी में लो प्रोफाइल ही चलेंगे. वो जदयू के दोनों सत्ता केन्द्रों के पीछे चलकर अपनी जगह और हैसियत दोनों बनायेंगे.

हालांकि अशोक चौधरी को जानने वाले लोग यह भी दावा करते हैं कि अशोक चौधरी किसी एक की ही छाया में चलनेवाले हैं. देर सबेर वो जदयू में भी नीतीश के बाद दो नंबर बनने की कोशिश करेंगे. उनके जाने के नफा-नुकसान पर अभी बिहार के कांग्रेस नेता चुप हैं, वो सब कुछ देख समझ रहे हैं.

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