चुनाव आयोग छोटे दलों के सम्मान की रक्षा करे : अरूप चटर्जी

-विश्वसनीयता और सम्मान की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाउंगा: अरूप चटर्जी

रांची: राज्यसभा चुनाव में झारखण्ड में हो रहे धनबल के प्रदर्शन पर निरसा के मासस (मार्क्सवादी कोर्डिनेशन समिति) विधायक अरूप चटर्जी ने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के सामने बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाया है. अरूप ने मासस और माले जैसी छोटी पार्टियों के सम्मान रक्षा का मौलिक सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग और विधानसभा को ज्ञापन देकर उनके द्वारा दिए गए मत को सार्वजनिक करने की मांग की है. अरूप ने सभी मिडिया से भी इस आग्रह को दुहराया है ताकि पता चल पाए कि किसने पार्टी और विचारधारा को तिलांजलि देकर क्रॉस वोटिंग की है.

अरूप चटर्जी का कहना है कि बड़े दलों को चुनाव एजेंट रखने की सहूलियत दी जाती है, लेकिन मासस जैसे छोटे दलों को यह सुविधा नहीं मिलती. ऐसे में किसी दुसरे दल के एजेंट को वोट दिखाने से वोट ही रद्द हो सकता है. इसलिए छोटी पार्टी के विधायक वोट दिखा नहीं सकते, अरूप ने भी ऐसा ही किया. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया और सुझाये गए १ (1 नहीं) को ही लिखा. एजेंट नहीं होने के इसी संवैधानिक अड़चन का फायदा उठाते हुए किसी ने अरूप पर क्रॉस वोटिंग का आरोप मढ दिया. इस आरोप से आहत अरूप ने सम्मान रक्षा के लिए चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि अगर उनके मत सार्वजनिक कर उनकी विश्वसनीयता और सम्मान की रक्षा नहीं की गयी तो वो शीर्ष न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे.

राजनीति गुरु से बात करते हुए अरूप चटर्जी ने कहा कि उनके 25 वर्षों का राजनीतिक सफर संघर्ष और सिद्धांत के रास्ते का रहा है. वो आम आदमी के साथ हमेशा मुद्दों और नीतियों के आधार पर खड़े होते रहे हैं. वामपंथ के संघर्ष पथ पर उन्होंने बहुत कुछ खोया है, माफियाओं से लड़ते हुए खत्म किये गए अपने पिता का रक्तरंजित शरीर देखा है. लेकिन डराने की, धमकाने की और प्रलोभन की हर साज़िश को नाकाम करते हुए वो चट्टान की तरह आज भी अपने निरसावासियों के साथ खड़े हैं और हमेशा रहेंगे. अरूप ने कहा कि निरसा के लोग जानते हैं कि विश्वसनीयता ही मेरी पूंजी है. अपना वोट और अपनी अंतरात्मा बेचने वाला वोटों का कोई सौदागर खुद को बेचे और उनके खिलाफ साजिश करे, यह उन्हें कबूल नहीं. वो हर हालत में अपने वोट को सार्वजनिक कराकर ही दम लेंगे, भले ही इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट ही क्यों ना जाना पड़े.

हमेशा भाजपा विरोधी झामुमो एवं अन्य दलों के गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े रहे अरूप चटर्जी ने सीधे-सीधे किसी पर आरोप तो नहीं लगाया है लेकिन उन्होंने झाविमो की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने कहा कि बंधू तिर्की झाविमो के एजेंट थे. प्रकाश राम ने भाजपा को वोट दे दिया, क्या पता प्रदीप यादव ने किसको वोट दिया. बंधू तिर्की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी हैं, वो भी इस खेल में प्रदीप यादव के साथ हो सकते हैं. उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी आग्रह किया है कि मामले का सच पता करें और असली नकली का भेद समझें.

अलग-अलग मीडिया फोरम पर अरूप चटर्जी ने क्या कहा, उसे सुनने के लिए नीचे दिये गये इस लिंक पर क्लिक करें....

  
  

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