अन्ना बेशकीमती हैं, उन्हें बचाना होगा

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की एक-एक सांस कीमती है. वो देश के लिए जरुरी हैं. उनका अनिश्चितकालीन अनशन देश के लिए है. वो देश के लिए ही भूखे प्यासे अनशन कर रहे हैं. वो वोट के लिए कुछ भी सच झूठ बोलने वाले नेता नहीं हैं, इसलिए उनके मंच पर किसी नेता के लिए जगह नहीं है. अन्ना हजारे उन मुट्ठी भर लोगों में हैं, जिनमे देश की चिंता है. बहुमत के अहंकार में डूबी सरकार उनके अनशन पर नोटिस नहीं ले रही है. लेकिन भारत के हर हिस्से में अन्ना के समर्थक और प्रशंसक हैं. अन्ना के समर्थक चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाये. उन्हें बचाया जाये.

दिल्ली में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने के बाद से अन्ना हजारे का साढ़े तीन किलो वजन घट गया है. हालांकि उनके एक सहयोगी द्वारा जानकारी दी गई है कि उनका रक्तचाप सामान्य है. अन्ना के साथ करीब 227 लोग अनशन पर बैठे हैं, इनमें से तीन लोगों की थकावट और कमजोरी के कारण रविवार को सेहत खराब हो गई थी और वे लोग बेहोश हो गए थे. अन्ना ने शुक्रवार को रामलीला मैदान में अनशन शुरू किया. वह मोदी सरकार से लोकपाल की नियुक्ति, किसानों के लिए उचित फसल मूल्य व चुनाव सुधारों पर कार्ययोजना चाहते हैं.

अन्ना ने लोकपाल की मांग करते हुए सात साल पहले 2011 में भी अनिश्चितकालीन अनशन किया था, उस वक्त उन्हें बहुत से लोगों का समर्थन मिला था, लेकिन इस बार अन्ना को ज्यादा लोगों का समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है. उनके अनशन के पहले दिन यानी शुक्रवार को करीब 3000 लोग रामलीला मैदान पहुंचे थे. शनिवार को भी करीब इतने ही लोग मैदान में थे. वहीं रविवार को रामलीला मैदान में कुछ कम लोग पहुंचे थे। 2011 में हुए अनशन के दौरान मैदान में कदम तक रखने की जगह नहीं होती थी। तो क्या इस देश के नौजवानों के लिए देश के सवाल उतने महत्वपूर्ण नहीं रहे!

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