आये भी वो, गए भी वो, ख़त्म फ़साना हो गया

-बाढ़ का जायजा लेकर लौटे पीएम, बिहार को मिला 500 करोड़ का बाढ़ राहत पैकेज
बिहार बाढ़ के प्रकोप से दहशत में है। अनियंत्रित पानी लगातार काल का चेहरा लेकर महाविनाश कर रहा है। राज्य सरकार ने थोड़े विलंब से ही सही लेकिन राहत का काम शुरू किया है। लेकिन बाढ़ की भीषण स्थिति में भी संवेदनहीन राजनेता अपनी गन्दी सियासत कर रहे हैं। राजनीतिक दांव खेले जा रहे हैं। इसी कड़ी में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार का दौरा किया और 500 करोड़ का राहत पैकेज अनाउंस किया। वैसे नुकसान के हिसाब से यह केन्द्रीय सहायता बेहद कम है।

बिहार में प्रतिवर्ष लाखों लोग बाढ़ की त्रासदी झेलते हैं, लेकिन नेता इस त्रासदी के बीच भी अपने सियासी शतरंज पर शह और मात का खेल खेलते रहते हैं। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ के एन वक़्त पर जेडीयू को एनडीए में जोड़ने की सियासत में जुटे थे। जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव का ध्यान भी अपनी ही पार्टी में ‘जन अदालत’ लगाने पर टिका था। खुद लालू यादव इस त्रासदी के बीच पीड़ितों के आंसू पोछने की बजाय अपना शक्ति प्रदर्शन करने में लगे हैं। लोकजनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान और केंद्र सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा कहां हैं, बिहार के लोगों को नहीं पता। सुशील मोदी का ध्यान लालू परिवार को सत्ता से उखाड़ने के बाद भी राजनीति में ही फंसा हुआ है और इन बातों से बेख़बर आरजेडी ‘जनादेश अपमान यात्रा’ और “देश बचाओ, भाजपा भगाओ” में जुटी है। वही केंद्र सरकार 2019 के चुनावी शतरंज की विसात बिछाने में जुटी है। मिशन 2019 में 360+ के आंकड़े के गणित की जुगत जारी है। बाढ़ के लिए कोई बेचैनी इन नेताओं में नहीं दिखती। तभी तो आज बिहार में बाढ़ की वजह से अब तक 418 लोगों की मौत हो गई है। बाढ़ का पानी भले ही कई जगह कम हो गया हो, लेकिन पानी से घिरे गांव और टूटी सड़कें तबाही की कहानी आज भी बयां कर रहीं है।

इसी बीच जिसका इंतजार था, आज वो भी हो गया- बाढ़ राहत पैकेज की घोषणा। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया। हवाई सर्वे के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मोदी के साथ रहे। पीएम मोदी ने बिहार के लिए 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। इससे पहले पीएम मोदी ने पूर्णिया में सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील मोदी और आला अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए उच्चस्तरीय बैठक भी की।

हाई लेवल मीटिंग के बाद पीएम मोदी ने बिहार को हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया है। साथ ही पीएम ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए एक केंद्रीय दल भेजने का भी आश्वासन दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों की फसल बीमा का तुरंत आकलन करने के लिए बीमा कम्पनियां अपने पर्यवेक्षक तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजें, जिससे किसानों को शीघ्र ही राहत पहुंचाई जा सके।

बाढ़ से प्रभावित सड़कों की मरम्मत के लिए सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को उपयुक्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ से विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान हुआ है, उसकी शीघ्र बहाली के लिए भी केन्द्र, राज्य सरकार की हर संभव मदद करेगा। प्रधानमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपए एवं गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपए की दर से सहायता भी दी जाएगी।

गौरतलब है कि भीषण बाढ़ ने राज्य के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को प्रभावित किया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अधिकांश लोग पलायन कर रहे हैं। लेकिन शायद ही कभी सरकारों ने इससे बचाव के लिए पर्याप्त पूर्व तैयारी की जरूरत महसूस की हो।

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