खूंटी में नीलकंठ मुंडा की राह आसान नहीं, झाविमो प्रत्याशी दयामनी बारला से होगा सीधा मुकाबला

खूंटी विधानसभा में मंगलवार को नामांकन पत्रों की जाँच के बाद अब 12 प्रत्याशी मैदान में हैं. भाजपा से नीलकंठ सिंह मुंडा,महागठबंधन से झारखण्ड मुक्ति मोर्चा पार्टी से सुशील पाहन, झारखंड विकास मोर्चा पार्टी से दयामनी बारला और बहुजन समाज पार्टी से सोमा कैथा मुख्य रूप से मैदान में हैं.जिसमे भाजपा प्रत्याशी नीलकंठ सिंह मुंडा अभी तक मजबूत दिख रहे हैं.वैसे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले पूर्व में नक्सली रहे मसीह चरण पूर्ति को भी कुछ काम समझा नहीं जा सकता है. दूसरी तरफ झारखण्ड विकास मोर्चा से समाजसेवी दयामनी बारला की स्थित भी मजबूत देखी जा रही है.दयामनी बारला भी कड़ी टक्कर दे सकती हैं.पहले खूंटी की जनता को यह लग रहा था की झामुमो से कोई मजबूत प्रत्याशी मैदान में होंगे लेकिन डमी प्रत्याशी उतारने पर भाजपा की राह आसान हो गई.स्थिति को भापते हुए झाविमो इसका लाभ लेने की पूरी तैयारी कर लिया है. भाजपा के बहुत कार्यकर्त्ता नाराज भी हैं जो नीलकंठ सिंह मुंडा को पसंद नहीं करते हैं.वैसे कार्यकर्त्ता कही न कही झाविमो को ही समर्थन करेंगे.इसके अलवा गांव देहात के ग्रामीण भाजपा प्रत्याशी नीलकंठ सिंह मुंडा से नाराज हैं.वैसे गांव के लोगों में मसीह चरण पूर्ति अपनी पकड बना लिया है.खूंटी में मिशनरी सुमदाय की संख्या अछी -खासी है.उनका वोट भाजपा को नहीं पड़ता है.इसबार उनका वोट झाविमो को पड़ सकता है.दयामनी बारला का मिशनरी समुदाय में काफी मजबूत पकड है.उसके बाद मुस्लिम वोटर कांग्रेस का है.आदिवासी-मूलवासी वोटर इसबार कई भागों में विखराव हो जायेगा.इससे भी भाजपा को नुकसान हो सकता है. भाजपा का खूंटी शहरी क्षेत्र में वोटर है.इसके अलवा कर्री.मुरहू के कुछ गांव के लोग भाजपा को वोट दे सकते हैं.इन गांव में सखी मंडल के मध्यम से नीलकंठ सिंह मुंडा ने वोट को समेटने का जुगाड़ कर रखा है.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो भाजपा प्रत्याशी को मसीह चरण पूर्ति ही टक्कर दे सकते हैं.2009 विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा से मसीह चरण पूर्ति ने भाजपा प्रत्याशी नीलकंठ सिंह मुंडा को कड़ी टक्कर देने का कम किया था. मसीह चरण पूर्ति मात्र 400 वोट से पिछड़ गये थे. उस समय वह जेल में बंद था.लेकिन इसबार तो वह जेल से बाहर है.मसीह चरण मूर्ति जेल से बाहर निकलने के बाद से ही खूंटी के सभी गांव का भ्रमण कर चुके हैं.गांव के एक-एक व्यक्ति से मिल चुके हैं. खूंटी की जनता ने उनको इसबार आशीर्वाद देने का मन बना लिया है. चुनाव में अभी समय है.इस बीच यदि स्थिति बदली तो कुछ भी हो सकता है.यदि भाजपा अपने असंतुष्ठ कार्यकर्ताओं को समझाने में सफल हो जाती है तो बाजी पलट सकती है.

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