दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को जी-20 शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन के बारे में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत बताई है कि आखिर इसमें कितने राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे। तिवारी ने कहा है कि शांति का संतुलन बहाल करना प्रमुख चुनौती है, जो यूक्रेन में अनावश्यक युद्ध के कारण बाधित हो रहा है। उन्होंने प्रासंगिकता की बात की है, लेकिन उन्हें इसे वास्तव में प्रभावशाली बनाने की जरूरत है। उन्होंने जी-20 समिट के महत्वपूर्ण उद्देश्यों की भी बात की है जैसे कि पर्यावरण की चुनौती का सामना करना। इस सम्मेलन में रूस और चीन के राष्ट्रपति नहीं होंगे और वे अपने प्रतिनिधियों को भेजेंगे।
नई दिल्ली: जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होने जा रहा है। इस सम्मेलन के बारे में कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत बताई है कि आखिर इसमें कितने राष्ट्राध्यक्ष भाग लेंगे। तिवारी ने कहा है कि शांति का संतुलन बहाल करना प्रमुख चुनौती है, जो यूक्रेन में अनावश्यक युद्ध के कारण बाधित हो रहा है। उन्होंने प्रासंगिकता की बात की है, लेकिन उन्हें इसे वास्तव में प्रभावशाली बनाने की जरूरत है। उन्होंने जी-20 समिट के महत्वपूर्ण उद्देश्यों की भी बात की है जैसे कि पर्यावरण की चुनौती का सामना करना। इस सम्मेलन में रूस और चीन के राष्ट्रपति नहीं होंगे और वे अपने प्रतिनिधियों को भेजेंगे। इसके अलावा, सम्मेलन के दौरान विभिन्न राजनयिक इवेंट्स भी होंगे जिनमें महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
यह सम्मेलन ग्लोबल स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटना होगी जहां विश्व के गणराज्यों के प्रमुख मिलकर अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य होगा पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों से निपटना। इसके अलावा, शांति के संरक्षण, आतंकवाद से निपटने और विभिन्न आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन चीन और रूस के राष्ट्रपतियों की अनुपस्थिति के कारण इन देशों के प्रतिनिधियों के संचालन में होगा। जी-20 शिखर सम्मेलन का महत्व बढ़ाते हुए मनीष तिवारी ने कहा, “यह सम्मेलन ऐसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों के लिए संगठित किया गया है जो वैश्विक सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण साबित होंगे। देशों के लोगों की प्राथमिकताओं को मजबूती प्रदान करने के लिए इस सम्मेलन के अवसर को उठाना चाहिए।” यह सम्मेलन अनुमानित रूप से 300 से 400 वर्ड की लंबाई में होगा।
स्रोत: rajneetiguru.com
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