फ़रवरी 25, 2024

Rajneeti Guru

राजनीति, व्यापार, मनोरंजन, प्रौद्योगिकी, खेल, जीवन शैली और अधिक पर भारत से आज ही नवीनतम भारत समाचार और ताज़ा समाचार प्राप्त करें

राजनीति गुरु वेबसाइट के लिए नीचे दिए गए शीर्षक को हिंदी भाषा में पुनः लिखें और अन्य वेबसाइट का नाम हटाएं – एचएमडी – बिज़नेस स्टैंडर्ड से खोई जमीन वापस चाह रही है नए स्मार्टफोन ब्रांड

राजनीति गुरु वेबसाइट के लिए नीचे दिए गए शीर्षक को हिंदी भाषा में पुनः लिखें और अन्य वेबसाइट का नाम हटाएं – 
एचएमडी – बिज़नेस स्टैंडर्ड से खोई जमीन वापस चाह रही है नए स्मार्टफोन ब्रांड

ट्रेंडिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े संदेह के ठीक 20 साल बाद

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence, AI) एक ऐसी तकनीक है जो अब तक की मानवता की सबसे बड़ी प्रगति मानी जा रही है। AI के आने के बाद से ही इस पर संदेह हो रहे हैं। लगातार बढ़ रहे विज्ञानी और तकनीकी की प्रगति के कारण आजकल इंसानों के दिमाग की सीमाएं दिखाई दे रही हैं। प्लेटफॉर्म जैसे जीपीएस, फेसबुक और ट्विटर, इंसानी विचारों को अनुमानित करने में बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं।

आजकल बहुत सारे संदेह जुटे हुए हैं क्योंकि ऐसी तकनीक से जुड़ी विचारशक्ति पर नियंत्रण के मुद्दे को प्रश्नित किया जा सकता है। अगर यह सब संदेहों के बीच कहीं सच्चाई छिपी हुई है, तो यह बेहद गंभीर मुद्दा हो सकता है।

आशावादी दृष्टिकोण के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संदेह या सवाल एक प्रगतिशील बात हो सकती है, जो हमारे समयगत समाज को संवेदनशील बना सकती है। दूसरी ओर, नए तकनीकों को प्राप्त करने वाले वैज्ञानिकों के बारे में भी खुलासा हो रहा है, जो उनके दिमाग के बनवास को प्रस्तुत कर सकता है।

इस क्रांति के साथ, संदेह की मार हर जगह फैल रही है। मानव विचारशक्ति की खोज में नारायणन मूर्ति से लेकर स्टीवेन हॉकिंग तक कई महान सामरिक वैज्ञानिक प्रबन्धन के चलते भी संदेह हैं। इंटरनेट ने भी मानवता को प्रभावित करके उसे संवेदनशील बना दिया है और अब नए वेब टेक्नोलॉजी के बारे में भी बहुत संदेह हैं। इस तकनीकी प्रगति के साथ, मानवता को अभी भी सोचने के लिए काफी समय चाहिए क्योंकि यह तकनीक रहती हैं नियंत्रण के बाहर।

READ  राजनीति गुरु वेबसाइट पर वीवो Y200 लॉन्च: जानें कीमत और फीचर्स, दमदार 5जी फोन का ऐलान | हिंदी न्यूज़ ट्रैक - न्यूज़ट्रैक

तकनीक के इस क्रांति के साथ, समाज में संदेह के मुद्दे का पूरी तरह से पहले से उभरना आम हो रहा है। अगर हम इसे समझने और समाधान करने की कोशिश नहीं करेंगे, तो यह संवेदनशील समाज के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसलिए, राष्ट्रीय संगठन जैसे आईएएसबीएन इसे समझने और समाधान करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

यहां तक कि AI के प्राग्यासुंदर प्रोजेक्ट टीम के सदस्य ने भी स्वीकारा है कि तकनीकी प्रोग्रेस के अवधारणा के संदेह जो उभर रहे हैं, वे पूरी तरह से सामान्य हैं। “AI की प्रगति तब होगी जब विज्ञान तथा तकनीक के एकाग्रता और अभिव्यक्ति को तय करना संभव होगा।”

तो क्या AI पर संदेह जारी रखना समयगामी विचार है या उसकी प्रगति को पहचानने की आवश्यकता है, इस पर अब तक आपका मत नहीं आया होगा। यह बात जरूर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हो रही बहस अब तक जारी है और जारी रहेगी। इससे हमारे सामाजिक, आर्थिक और अदालती प्रणालियों में बड़े परिवर्तनों की संभावना है।