मार्च 1, 2024

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राजनीति गुरु – लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने पर अखिलेश का बयान – ये सम्मान में नहीं, बल्कि वोट साधने के लिए दिया गया

राजनीति गुरु – लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न मिलने पर अखिलेश का बयान – ये सम्मान में नहीं, बल्कि वोट साधने के लिए दिया गया

लालकृष्ण आडवाणी के भारत रत्न सम्मान से नाराज हुए उम्मीदवार, अखिलेश यादव
भारतीय राजनीति में एक बड़ा खड़ा हो गया है क्योंकि भारत रत्न सम्मान से सम्मानित होने का अधिकार उन्हें दिया जा रहा है। लालकृष्ण आडवाणी ने यह सम्मान प्राप्त किया है, जो पूरी देशसेवी सेवा और राष्ट्रियता के कारन काफी महत्वपूर्ण है। इस प्रशंसापूर्ण माख़ियों में उन्हें अचानक से लाभ मिल रहा है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर अपना बयान देते हुए कहा, “लालकृष्ण आडवाणी के यह सम्मान केवल वोट साधने के लिए दिया गया है। यह महानायक को सम्मानित करने की सोच से बचते हुए केवल राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया गया है।”

इस बयान को अखिलेश यादव ने बलरामपुर के एक कार्यक्रम में दिया। यह उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा को जगाने का एक प्रयास था। वे लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि सरकार एक समिप्त समारोह के माध्यली अच्छाई की भावनाओं का उपयोग करके फर्जी महानायकों के सम्मान को बढ़ा रही है। आडवाणी के सम्मान में इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके को अपवित्रता की बात कहा गया है।

यह बयान पूर्णतः आपातकाल की योजना के तहत किया गया है और यह एक भाजपा सरकार के खिलाफ सीधे हमले की ओर इंगित कर रहा है। आडवाणी को सम्मानित करने के लिए, भारतीय वोटबैंक का एक और साधारण हाथ कमजोर होगा। आडवाणी के बारे में अखिलेश यादव ने बहुत गम्भीरता से कहा, “यह सम्मान उन्हें नहीं दिया जाना चाहिए था, इसके बजाय उन्हें बहुत सराहना की जानी चाहिए थी।”

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यहां यह आपत्तिजनक बात है क्योंकि इस मामले में लाखों लोगों के समर्थन में लालकृष्ण आडवाणी हैं जो कि सरकार की व्यापक समर्थन का अभिलाषा नहीं रखते हैं। वे चाहते हैं कि यह सम्मान उन्हें युगपत सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत दिया जाये जिससे कि लोग उन्हें पहचानें और उनको ज्ञान करें।

इससे पहले भी कई ऐसे मुद्दे सामने आए हैं जहाँ भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म, अद्वैत और नायकों की महानता का भाव प्रयोग करती रही है। पिछली बार साराभाई पटेल के सम्मान की कवरेज के दौरान भी ऐसी ही बात सामने आई थी, जब कि अखिलेश यादव ने उसे इंगित किया था।

यहां भाजपा के इस दमन में केवल सामाजिक समर्थकों को हिट हो सकता है जो अगर इस तरह के समारोहों को अक्षम रह सकते हैं। इस बात की जांच होनी चाहिए और इसे ठीक ढंग से शोधन किया जाना चाहिए ताकि यहाँ निष्पक्षता दर्शन बनाए रखा जा सके।