मार्च 3, 2024

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राजनीति गुरु की वेबसाइट के लिए निम्नलिखित शीर्षक को हिंदी में दोबारा लिखें और अन्य वेबसाइट का नाम हटाएं: भारतीय सेना 15 मार्च तक छोड़ दे मालदीव… चीन से लौटते ही मुइज्जू ने दिखाए रंग, भारत विरोध में फिर उतरे – नवभारत टाइम्स

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भारतीय सेना 15 मार्च तक छोड़ दे मालदीव… चीन से लौटते ही मुइज्जू ने दिखाए रंग, भारत विरोध में फिर उतरे – नवभारत टाइम्स

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपनी पहली राजकीय यात्रा के बाद भारत लौट आए है। उन्होंने चीन से लौटने के बाद भारत विरोध में जुट गए है। मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को देश छोड़ने के लिए एक समय सीमा दे दी है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपनी पहली राजकीय यात्रा के बाद भारत विरोध में आवाज उठाते हुए भारत फिर से लौट आए हैं। वे चीन से लौटने के बाद ही भारत में अपनी पहली पब्लिक बयानी देंगे।

मोहम्मद मुइज्जू ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारतीय घातक सेना पर आजाद भारत से दूर जाने की आवाज बुलंद की जा रही है। उन्होंने भारतीय सैनिकों के लिए जो देश छोड़ने की सीमा तय की है, उसे आवश्यकता का एक प्रमाणित का दर्जा दिया है।

मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए ये बयान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुंहतोड़ जवाब देने के काफी पक्षाघाती हैं। यह अभिनय बाध्य करने की कोशिश है कि भारतीय सैनिकों को उनकी क्षमता से परे सीमा में जाने की सिफारिश की जा रही है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को समाचारों की स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक उन्होंने चीन से लौटने के बाद भारत के साथ एक नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने भारतीय सैनिकों को कहा है कि उन्हें अपनी वतन सेवा को त्याग देने के लिए एक संकेत दिया जाएगा।

अब बात हो रही है कि मालदीव और भारत के रिश्ते इतने मजबूत कैसे हैं कि उनके राष्ट्रपति भी इतनी नकारात्मक भाषा का उपयोग करके भारत को दूषित करने की कोशिश कर रहे हैं? मालदीव के राष्ट्रपति को ध्यान देने की जरूरत है कि जब वह भारत के लौट रहे थे तो उनके शब्दों का कोई असर नहीं पड़ रहा था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि वह कुछ कर सकते हैं।

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मालदीव के राष्ट्रपति के बारे में इतना नकारात्मक बयान देना काफी एक आश्चर्यजनक है। हमें यह देखकर हैरानी होती है कि ऐसे व्यक्ति जो आतंकवाद के खिलाफ खुद लड़ने के लिए प्रस्तुत थे, अब अपने पड़ोसी देश के खिलाफ दबाव बनाने में लगे हुए हैं।

आखिरकार मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा उठाए गए बयान भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मुंहतोड़ जवाब देने के काफी पक्षाघाती हैं। हमें उम्मीद है कि उन्हें इस पर विचार करने का समय दिया जाएगा और मालदीव के राष्ट्रपति अपने बयानों को सावधानीपूर्वक चुनेंगे।

इस सभी तरह के परिणामस्वरूप भारतीय सरकार को यह उठाने की जरूरत है कि वह अपनी नजर बारम्बार इतने आँखों में रखे जो भारत के खिलाफ दबाव बना रहे हैं।