झारखंड की धरती पर रहने वाले सभी आदिवासी : शुक्ल

आगामी 30 नवंबर से 3 दिसंबर तक राजधानी रांची में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 63वां राष्ट्रीय महाधिवेशन होने जा रहा है। इस महाधिवेशन में पूरे देश से छात्र संगठन के नेता, कार्यकर्ता देश के ज्वलंत मुद्दों पर मंथन करेंगे। सरकार को युवाओं के चिंतन- मनन से अवगत करायेंगे। इस महाधिवेशन और झारखंड सहित अन्य मुद्दों पर अभाविप के प्रदेश संगठन मंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने राजनीतिगुरु से खास बातचीत की। पेश है इसका मुख्य अंश...

अभाविप के 30 नबंवर से आयोजित राष्ट्रीय महाधिवेशन के मुख्य मुद्दे क्या रहेंगे?
देखिए, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश की आजादी के तुरंत बाद 1949 से ही अस्तित्व में आ गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि जब भारत आजाद हुआ तो यह कई रियासतों में बंटा हुआ था। देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया। उनका योगदान देश के एकीकरण में अहम है। भारत को क्यों संघर्ष करना पड़ा, इसके पीछे के क्या तर्क हैं। इसकी जानकारी जरूरी है। देखा जाय को देशभक्ति है पर राष्ट्रीय एकात्मकता नहीं है। भाषा, वेशभूषा, संस्कृति के लिहाज से देखें तो हमारा देश विविधताओं से भरा है। कह सकते हैं कि विविधता में एकता का देश है भारत। ऐसे में पूरे देश में राष्ट्र के कुछ मुद्दों पर देशवासी एकमत हों, इस भावना का संचार अभाविप राष्ट्रभक्त संगठन होने के नाते करता है। इस महाधिवेशन के माध्यम से प्रत्येक वर्ष लघु भारत दर्शन की परिकल्पना को साकार किया जाता है। देश के प्रत्येक जिले के कार्यकर्ता इसमें हिस्सा लेते हैं। ताकि पूरे देश की विविधता को समझें, समाज के उत्थान और भलाई के लिए सोचें। देश के शासन- प्रशासन में क्या जरूरी है। युवाओं की अपेक्षाएं क्या हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की गुंजाईश है या नहीं। इसके अलावा कानून व्यवस्था, नक्सलवाद, शहरी नक्सलवाद इस पर सरकार का रुख क्या हो, सरकार को इससे संबंधित प्रस्ताव भी दिया जाएगा।
पर्यावरण एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। जल, जलाशय, नदी और वन का संरक्षण कैसे हो, युवाओं की भूमिका क्या हो। युवा कैसे सोचता है इन मुद्दों पर, सरकार को अवगत कराया जाएगा।

झारखंड में अक्सर आदिवासी, मूलवासी की बात होती है इस संबंध में भी उनकी परंपराओं को लेकर प्रस्ताव दिया जाएगा। वैसे देखा जाय तो झारखंड की धरती पर रहने वाले सभी आदिवासी हैं उनमें कुछ जनजातीय समुदाय हैं इसे समझने की जरुरत है।
महिलाओं के बारे में विद्यार्थियों को विशेषतौर पर शिक्षित करने की जरुरत है। कैसे समाज में महिलाओं के प्रति व्यवहार करना है इसे कोर्स करिकुलम में शामिल करने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही 40 साल से कम आयु के युवाओं को प्रध्यापक यशवंतराव केलकर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इसमें ऐसे लोगों का चयन किया जाता है जो अपने-अपने क्षेत्र में कोई विशिष्ट काम कर रहे हैं। जिससे समाज को नई दिशा और युवाओं को प्रेरणा मिलती है।
इसके अलावा इस्लामिक बैंक, कौशल विकास, विदेश नीति, नई शिक्षा नीति पर भी विशेष चर्चा की जाएगी।

अभाविप के कार्यकर्ता आंदोलन करते हैं तो सरकार उनपर लाठियां बरसाती है, जबकि वे राष्ट्रवाद की बात करते हैं दूसरी ओर भाजपा सरकार यूनिवर्सिटी में वामपंथियों को कुलपति बना रही है ऐसा क्यों ?
देखिए, अभाविप का काम जनजागरण का है, सरकार को वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराने का है। सरकार की दिशा ठीक हो यह विद्यार्थी परिषद कोशिश करती है। हमारा विरोध किसी से नहीं है। कौन सा व्यक्ति सरकार के द्वारा कुलपति बनाया जा रहा है यह सरकार का काम है। सरकार का काम है जनकल्याण करना, लोक कल्याण प्रभावित होता है तो हम संवाद से समाधान की कोशिश करते हैं जब नहीं होता है तो हम सड़क पर उतर कर संघर्ष करते हैं। पर निश्चित रूप से सरकार को सोचना चाहिए कि जो व्यक्ति सरकार की नीतियों के खिलाफ बोल रहा है, आरएसएस को गाली दे रहा है उसे सरकार कुलपति बना रहा है तो सरकार को इस विषय में सोचना चाहिए।

क्या आप वर्तमान सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं?
सरकार क्या काम कर रही है इसमें हमारी उतनी दिलचस्पी नहीं है। हर सरकार अपने हिसाब से काम करती है। अभाविप किसी सरकार की मोहताज नहीं है। हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में तो सरकार ने कई पहल किए हैं। रांची यूनिवर्सिटी को अपग्रेड किया गया है। बिनोद बिहारी विश्वविद्यालय बनायी जा रही है। रक्षा विश्वविद्यालय स्थापित की जा रही है। राज्य में तीन मेडिकल कॉलेज बनाये जा रहे हैं। ये सरकार के सही कदम हैं। पर इसके साथ ही राज्य में शिक्षकों के साथ ही अन्य लाखों पद रिक्त हैं। इन पदों पर बहाली नहीं हो रही है, जिससे राज्य के बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले। इसके लिए खासतौर पर यहां की ब्यूरोक्रेसी जिम्मेवार है। अधिकारी नहीं चाहते की झारखंड का विकास हो।

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