आदिवासी समाज के रीति-रिवाज पर सवाल उठाना गलतः डॉ देवशरण भगत

पत्थलगड़ी को लेकर मचे विवाद ने पूरे राज्य के सियासत को गरमा दिया है, इस मामले को लेकर तरह-तरह के बयान और कयास सामने आ रहे हैं। यह आंशका व्यक्त की जा रही है कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश है, वहीं यह भी कहा जा रहा है कि कुछ लोग जानबूझकर भोले-भाले आदिवासियों को मोहरा बनाकर अपना हित साधने की कोशिश कर रहे हैं। इन सब के बीच आजसू पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने कहा है कि आदिवासी समाज से आज देशभक्ति का प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है।

उनकी भाषा, संस्कृति व रीति-रिवाज आदि पर बेवजह सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा ने जिस सभ्यता-संस्कृति की रक्षा के लिए प्राणों की आहूती दी, उस संस्कृति पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। श्री भगत ने कहा कि भगवान बिरसा के अबुआ दिशुम-अबुआ राज की भावना को समझना होगा और उनके विरासत को सहेज कर रखना जरूरी है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को चाहिए कि राज्य की सभ्यता, संस्कृति, पहचान एवं परंपरा को समझे और जन-भावनाओं के अनुरूप जनमानस को विकास की धारा में जोडे़। उन्होंने कहा कि आजसू प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखने की आह्वान करती है, और इसका कोई गलत उपयोग न करे इसके लिए भी सचेत रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संविधान सभा में स्व जयपाल सिंह मुण्डा ने कहा था कि झारखण्ड के गांव में संचालित व्यवस्था एक संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था है और यह भारत में लोकतंत्र आने से सदियों पहले से चली आ रही प्रथा है।

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