राजद के साथ मिलकर सियासी खीर पकाएंगे कुशवाहा

थोड़े दिनों के सियासी युद्धविराम के बाद लगता है केंद्रीय मंत्री और रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपना स्वर और तेवर दोनों बदलना शुरू किया है। तभी तो कुशवाहा ने पटना के एक कार्यक्रम में कह दिया कि यादवों का दूध और कोइरी का चावल अगर मिल जाये तो अच्छी खीर बन सकती है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि इस दूध और चावल के अतिरिक्त छोटी छोटी जातियों का पंच मेवा भी इसमें मिल जाये तो बहुत ही स्वादिष्ट खीर बनेगी।

कुशवाहा के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज़ हो गयी कि कद्दावर कुशवाहा नेता का महागठबंधन में जाना तय है, लगे हाथों राजद के राजकुमार तेजस्वी यादव ने भी कुशवाहा की सियासी खीर वाली बात का समर्थन कर दिया। तेजस्वी ने ट्वीट कर कुशवाहा को स्वादिष्ट और ऊर्जावान सियासी खीर के लिए शुभकामनाएं भी दे दी।

हालांकि कुशवाहा जे बयान पर जदयू ने बड़ी होशियारी वाली प्रतिक्रिया दी है। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में उपेंद्र कुशवाहा ने राजद के जंगलराज का हमेशा विरोध किया है, इसलिए उनकी निष्ठा पर सवाल ही नहीं उठता और वो कहीं नहीं जानेवाले।

उपेंद्र कुशवाहा सीट को लेकर एनडीए में असहज तो हैं हीं। नीतीश कुमार से उनकी राजनीतिक अदावत भी जगजाहिर है। हवाओं का रुख देखकर और राज्य सरकार द्वारा अपनी लगातार उपेक्षा से आहत कुशवाहा संभव है जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले लें, अगर ऐसा होता है, जिसपर अभी भी बहुत लोगों को भरोसा नहीं है तो वो बिहार की एनडीए राजनीति के लिए बड़ा झटका होगा।

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