क्या लोकमंथन में गरीबों की हो रही भूख से मौत पर चर्चा होगी- कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राजेश ठाकुर ने संतोषी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पिछले दिनों भूख से पूरे देश में 56 मौतें हुई जिसमें सिर्फ 2017 -18 में 42 मौतें हुई है और उसमें लगभग 15 मौतें केवल झारखंड में हुई हैं। इनमें 25 मौत के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता जिम्मेदार है। झारखंड में भूख से मरने वालों में ज्यादातर लोग आदिवासी या दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में देखें तो इसमें पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को भी शामिल किया जा सकता है। इन सभी मौतों के लिए सरकार जिम्मेदार हैं।

आज संतोषी की मौत के 1 वर्ष पूरा हो रहा है इसलिए हमें यह कहना पड़ेगा कि विपक्ष के दबाव में मुख्यमंत्री ने संतोषी के गांव कारामाटी के लोगों से उस दौरान मुलाकात की थी और कहा था कि गांव के लोगों को समृद्ध बनाने के लिए अगरबत्ती मोमबत्ती बनाने की प्रशिक्षण दी जाएगी, साथ ही साथ बकरी-सूकर पालन के लिए आर्थिक सहायता भी की जाएगी, लेकिन सरकारी उदासीनता की वजह से गांव के वर्तमान हालत को देखकर ऐसा लगता नहीं है। संतोषी का परिवार सरकार द्वारा प्रदत्त कई योजनाओं को पाने का हकदार था लेकिन एक मध्याह्न भोजन को छोड़ दिया जाए तो किसी भी योजना का लाभ उस परिवार को नहीं मिल रहा है। आधार कार्ड की अनिवार्यता की वजह से राशन, पेंशन, मनरेगा, विधवा पेंशन, मातृत्व लाभ जैसे कई योजनाओं से झारखंड के लोगों को वंचित होना पड़ता है। उदारहण के लिए राजेन्द्र बिरहोर, जन वितरण योजना का लाभ, संतोषी कुमारी का आधार कार्ड नहीं होने के कारण राशन कार्ड का लिंक नहीं होना, रूपलाल मरांडी के अंगूठे बायोमेट्रीक सिस्टम में अंगूठा का निशान घीस जाने के कारण राशन नहीं मिलना, प्रेमनी कुंवर के आधार कार्ड गलत खाते में लिंक होने कारण पैसा दूसरे के खाते में चला गया और प्रेमनी कुंवर की मौत भूख से हुई।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का आधार पर आये फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इन योजनाओं में आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त होने से संतोषी जैसे कई परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल सकेगा, जिससे भूख से मौत के मामलों में कमी आयेगी।
बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की भीड़ रूपी भूख को मिटाने के लिए जिस तरह से सरकारी तंत्र का दुरूपयोग लोगों को जुटाने का प्रयास किया गया, अगर इन संसाधनों का इस्तेमाल कर गरीबों का भूख मिटाने का प्रयास किया जाता तो भूख से मौत के मामलों में झारखंड की बदनामी राष्ट्रीय मानचित्र पर नहीं होती। सामाजिक सुरक्षा के पैसों का जिस तरह से दुरूपयोग हुआ, वह जगजाहिर है। योजनाओं के प्रचार-प्रसार के खर्च को भीड़-जुटाने में खर्च किया गया।

श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान सात जिलों, खूंटी, रांची, रामगढ़, बोकारो, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग को भीड़ जुटाने की विशेष जिम्मेदारी दी गई। परिवहन विभाग को निजी विद्यालयों से वाहन लेने की जिम्मेदारी दी गई थी। जिसके कारण कई विद्यालयों को परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा। समाज कल्याण विभाग, कल्याण विभाग, सामाजिक सुरक्षा कोषांग, मनरेगा, जेएसपीएलएस सहित कई विभागों के पैसे को भीड़ जुटाने के लिए खर्च किया गया।

श्री ठाकुर ने कहा कि जनजातिय क्षेत्र उपयोजना एवं कला-पर्यटन एवं संस्कृति विभाग से खर्च कर जो लोकमंथन कार्यक्रम कराया जा रहा है, क्या उस मंथन में आदिवासी, दलितों की हो रही भूख से मौत पर चर्चा होगी? उन्होंने कहा कि जैसे जैसे फिजूल खर्जी का रिकॉर्ड सरकार बनाएगी उसी प्रकार भूख से मौत का रिकॉर्ड भी बनता जाएगा। सरकार जितना विज्ञापन पर ध्यान देती है, उतना गरीबों पर देती तो राज्य का भला हो जाता।
इस अवसर पर प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ राजेश गुप्ता मौजूद थे।

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