विपक्ष के टारगेट पर क्यों हैं सुदेश महतो

सूबे के दो विधानसभा सीटों सिल्ली और गोमिया में आगामी 28 मई को मतदान होने वाला है। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं, एक-दूसरे पर खूब आरोप लगाए जा रहे हैं। इन सब के बीच राज्य का सबसे हाईप्रोफाइल सीट सिल्ली पूरे विपक्ष के निशाने पर है। हर दिन कोई न कोई बड़ा नेता क्षेत्र का दौरा कर रहा है। गांव-गांव में विपक्षी दल के कद्दावर नेता घूम-घूमकर झामुमो उम्मीदवार सीमा महतो के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि झामुमो के पूर्व विधायक को साजिश के तहत फंसाया गया।

बहरहाल, सिल्ली विधानसभा के बारे में जानने वाले राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो विपक्ष के इस अप्रत्याशित जमावड़े से क्षेत्र की जनता के मन में कई सवाल पैदा हो रहे हैं। वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या है कि पूरा विपक्ष आजसू के एक उम्मीदवार सुदेश महतो के पीछे पड़ा हुआ है? क्यों सुदेश के बारे में ऐसी बातें कही जा रही हैं जो कहीं से भी उन पर साबित नहीं होतीं ? ध्यान रहे कि विपक्ष ने उन्हें सियासी दलाल कहा है इतना ही नहीं झाविमो नेता बंधु तिर्की ने तो उनकी नाभि में तीर मारने तक की बात कही है। सुदेश महतो की निजी जिंदगी को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं।

उधर, आजसू की ओर से किसी भी प्रकार का कोई तीखा हमला अभी तक नहीं देखा-सुना गया है। इससे धीरे-धीरे सिल्ली की फिजा में ये बात तेजी से फैल रही है कि विपक्ष सुदेश महतो के बड़े राजनैतिक हैसियत को देखते हुए ही उनपर हमलावर है और नहीं चाहती है कि वे उपचुनाव जीत पाएं।

जानकारों की मानें तो इसके दो कारण हो सकते हैं पहला यह कि सुदेश महतो का बढ़ता कद विपक्ष को पूरे सूबे में परेशान कर सकता है इसलिए वह नहीं चाहता कि कोई ऐसा सियासी दल उभरे जो उनकी राजनीति पर असर डाले। दूसरा यह कि जिस प्रकार सुदेश महतो ने जनमुद्दों को लेकर सरकार को घेरा है और आजसू को जिस तरह का जनसमर्थन मिला। उससे विपक्ष को कई बार असहजता महसूस हुई है, इसीलिए वह नहीं चाहता की झारखंड की राजनीति में कोई ऐसा पावर हाउस तैयार हो जो उनकी हैसियत को कमजोर करे।

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